इटारसी / नर्मदापुरम// सात साल बाद इस बार मानसून की बेरुखी ने तवा डैम को फिर प्यासा छोड़ दिया। नर्मदापुरम और हरदा जिले की जीवनदायिनी और हरित क्रांति का प्रतीक कहे जाने वाला तवा बांध इस पूरे सीजन में लबालब नहीं भर पाया। स्थिति यह है कि बरसात का सीजन विदाई की ओर है और डैम का पेट अभी भी खाली है।
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो तस्वीर बेहद चिंताजनक है। तवा डैम का पूर्ण भराव स्तर (FRL) 1166.00 फीट है, जबकि 20 सितंबर तक डैम का जलस्तर 1160 फीट के आसपास ही अटका हुआ है। यानी अभी भी डैम को पूरा भरने के लिए करीब 6 फीट पानी की और जरूरत है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक डैम इस बार महज 82 फीसदी ही भर सका है, जो मानसून की विदाई के साथ मिलना अब लगभग असंभव माना जा रहा है।
2017-18 के बाद पहली बार ऐसी स्थिति
तवा परियोजना से जुड़े किसानों और अधिकारियों का कहना है कि 2017-18 के बाद पहली बार ऐसा नजारा देखा गया है जब सितंबर के आखिरी में भी तवा लबालब नहीं हो पाया। हर साल इस समय तक डैम के गेट खोलने की नौबत आ जाती थी, लेकिन इस बार उल्टी स्थिति है।
आधे से भी कम हुई बारिश
इस बार मानसून की बेरुखी का अंदाजा जिले के वर्षा आंकड़ों से ही लगाया जा सकता है।
नर्मदापुरम जिले में 15 सितंबर तक औसत वर्षा मात्र 785.5 मिलीमीटर दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 1282.9 मिलीमीटर बारिश हो चुकी थी। जिले की सामान्य औसत वर्षा 1370.5 मिमी मानी जाती है। यानी इस बार सामान्य औसत के मुकाबले आधी बारिश भी नहीं हुई है।
कैचमेंट एरिया पचमढ़ी, तवानगर और बैतूल के सारणी क्षेत्र में भी बारिश बेहद कमजोर रही, जिससे डैम में आवक न के बराबर रही।
किसान चिंतित: गेहूं-चना ठीक, पर मूंग पर संकट
तवा डैम नर्मदापुरम और हरदा के करीब 3 लाख हेक्टेयर रकबे में सिंचाई का मुख्य स्रोत है। डैम के अधूरे रहने का सीधा असर किसानों पर पड़ने वाला है।
जल संसाधन विभाग के मुताबिक वर्तमान जल भंडार से रबी सीजन में गेहूं और चने की फसल के लिए तो पर्याप्त पानी है, लेकिन ग्रीष्मकालीन मूंग के लिए पानी देना असंभव सा नजर आ रहा है।
ऐसे में मूंग की बोवनी के समय बवाल मचने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। किसान संगठनों ने पहले ही नहरों से पानी की मांग को लेकर आवाज उठानी शुरू कर दी है।
बिजली उत्पादन और पेयजल पर भी खतरा
सिंचाई के साथ-साथ तवा डैम से जलविद्युत उत्पादन और इटारसी-नर्मदापुरम शहर के पेयजल की आपूर्ति भी होती है। जलस्तर कम रहने से बिजली उत्पादन में भी कटौती की आशंका है। यदि सर्दी और गर्मी में पानी की खपत ऐसी ही रही तो अगले साल मई-जून में पेयजल संकट भी गहरा सकता है।
आंकड़े -
* डैम का अधिकतम स्तर: 1166.00 फीट • वर्तमान स्तर (20 सितंबर तक): ∼1160 फीट • भराव: 82% • अभी और चाहिए: 6 फीट पानी • जिले में बारिश (15 सितंबर तक): 785.5 मिमी (पिछले साल 1282.9 मिमी, औसत 1370.5 मिमी) • प्रभावित सिंचाई क्षेत्र: 3 लाख हेक्टेयर
फिलहाल किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हैं, लेकिन मौसम विभाग ने मानसून की विदाई की घोषणा कर दी है, जिससे तवा के इस साल पूरा भरने की उम्मीद लगभग खत्म हो गई है।
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