भोपाल/ नर्मदापुरम  किसानों से जुड़ी सरकारी योजनाओं में तारीखें तय करने की तेजी खरीदी शुरू करने के मामले में नजर नहीं आ रही है। मध्य प्रदेश सरकार ने खरीफ की फसलों के पंजीयन का कैलेंडर तो जारी कर दिया, लेकिन खरीदी कब शुरू होगी, इस पर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। नतीजा यह है कि सोयाबीन की कटाई अंतिम दौर में पहुंच चुकी है और किसान रबी की बोवनी की तैयारी में जुटने को मजबूर हैं, लेकिन उपज के उचित दाम मिलने की कोई गारंटी नजर नहीं आ रही। सरकारी खरीदी की तारीख घोषित नहीं होने से कई किसान मंडियों में कम दाम पर सोयाबीन बेच रहे हैं।
सरकार की ओर से धान, ज्वार, बाजरा, सोयाबीन और कोदो-कुटकी के पंजीयन की तारीखें घोषित की गई हैं। लेकिन किसानों के लिए असली सवाल पंजीयन नहीं, उपज बेचने का है। खाद, बीज और डीजल के लिए नकदी की जरूरत के बीच खरीदी का इंतजार किसानों की मुश्किल बढ़ा रहा है।
सोयाबीन खेत से निकली, खरीदी का इंतजार बरकरार
प्रदेश में सोयाबीन की कटाई लगभग पूरी होने की स्थिति में है। इसके बावजूद सरकारी खरीदी की तारीख घोषित नहीं हुई है। सोयाबीन के लिए भावांतर योजना के तहत पंजीयन की प्रक्रिया चल रही है, जिसकी अंतिम तारीख 17 अक्टूबर तय की गई है।नर्मदापुरम में धान न बिकने और फसल खराब होने के कारण इस समय किसान भारी परेशानियों से जूझ रहे हैं। जिले में कम बारिश और सिंचाई संकट के चलते जहां एक ओर धान की फसल खेतों में ही सूखकर पीली पड़ रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी व्यवस्था और मंडियों में उचित दाम न मिलने के कारण किसानों में भारी आक्रोश है।
किसानों की परेशानी यह है कि उन्हें अगली फसल की बोवनी के लिए तत्काल पैसे चाहिए। ऐसे में सरकारी व्यवस्था का इंतजार करने के बजाय मंडियों में उपलब्ध भाव पर उपज बेचने का विकल्प चुनना पड़ रहा है। यदि बाजार भाव उम्मीद से कम हैं, तो इसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ता है।
भोपाल के खजूरी कलां के किसान कुबेर सिंह राजपूत का कहना है कि सरकार को सोयाबीन की खरीदी की तारीख तत्काल घोषित करनी चाहिए। किसानों को रबी की बोवनी के लिए खाद, बीज और डीजल खरीदना है। ऐसे में उपज का उचित मूल्य समय पर मिलना जरूरी है।
सात लाख किसानों ने कराया पंजीयन, खरीदी की तारीख गायब
धान, ज्वार और बाजरा को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बेचने के लिए पंजीयन की समयसीमा समाप्त हो चुकी है। प्रदेश में करीब सात लाख किसानों ने इन फसलों के लिए पंजीयन कराया है। इसके बावजूद खरीदी कब शुरू होगी, इसकी आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है।
धान की कटाई शुरू होने में अभी समय है, लेकिन किसान पहले से यह जानना चाहते हैं कि सरकारी खरीदी की व्यवस्था कब से शुरू होगी। समय पर तारीख और व्यवस्था की जानकारी मिलने से किसान अपनी उपज बेचने की योजना बना सकते हैं। फिलहाल पंजीयन कराने के बाद भी उन्हें खरीदी की घोषणा का इंतजार करना पड़ रहा है।
कोदो-कुटकी के लिए 5 नवंबर तक पंजीयन
कोदो-कुटकी के उपार्जन के लिए किसानों को 5 नवंबर तक पंजीयन कराने का अवसर दिया गया है। इन फसलों की आवक नवंबर में होने की उम्मीद है। खरीदी दिसंबर में शुरू होने की बात कही जा रही है, लेकिन इसकी आधिकारिक तारीख भी अभी घोषित नहीं हुई है।
इस तरह अलग-अलग फसलों के लिए पंजीयन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन खरीदी का स्पष्ट कार्यक्रम सामने नहीं आने से किसानों के बीच असमंजस बना हुआ है।
उड़द खराब, खरीफ की दूसरी फसलों पर भी संकट
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता आनंद जाट का कहना है कि इस साल खरीफ की सभी फसलों को नुकसान हुआ है। उड़द की फसल पूरी तरह खराब होने से किसानों को भारी घाटा उठाना पड़ा है। ऐसे हालात में सरकार को किसानों को राहत देने और उनकी उपज के उचित मूल्य की व्यवस्था करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।
खरीफ की फसलों में नुकसान और बाजार में कम भाव की आशंका के बीच किसान अब रबी की बोवनी के लिए जरूरी संसाधन जुटाने की चिंता में हैं। ऐसे समय में खरीदी की तारीखों को लेकर अनिश्चितता उनकी परेशानी और बढ़ा रही है।
सवाल पंजीयन का नहीं, उपज के दाम और भुगतान का है
सरकार के सामने चुनौती सिर्फ किसानों का पंजीयन कराने की नहीं, बल्कि समय पर खरीदी शुरू करने और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की भी है। पंजीयन के आंकड़े तैयार होने से किसान की समस्या खत्म नहीं होती। उसे राहत तब मिलेगी, जब खरीदी की तारीख स्पष्ट होगी, केंद्रों पर व्यवस्था उपलब्ध होगी और उपज बेचने के बाद भुगतान समय पर मिलेगा।
किसानों के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है—जब पंजीयन की तारीखें तय हो सकती हैं, तो खरीदी की तारीख घोषित करने में देरी क्यों?