इटारसी। लोक अदालत का नाम सुनते ही आम आदमी को उम्मीद होती है—कुछ राहत मिलेगी, पुराना बोझ हल्का होगा और विवाद का समाधान निकलेगा। लेकिन इटारसी में शनिवार को तस्वीर कुछ अलग नजर आई। नगरपालिका ने लोक अदालत के मौके पर एक ही दिन में करीब 33 लाख रुपये की वसूली कर ली, लेकिन नगर पालिका की दुकानों का किराया और कमर्शियल टैक्स जमा करने पहुंचे कुछ व्यापारियों के सामने 6.25 प्रतिशत पेनल्टी का ऐसा हिसाब आया कि राहत की उम्मीद नाराजगी में बदल गई।
यानी एक तरफ लोक अदालत का संदेश—समाधान और राहत, दूसरी तरफ ऑनलाइन पोर्टल पर जुड़ी पेनल्टी—पूरा भुगतान करो या इंतजार करो।
पौधा भी लगा, राजस्व भी उगा... लेकिन व्यापारियों के सवाल कौन सुनेगा?
नेशनल लोक अदालत की शुरुआत हरित महा अभियान-2026 के तहत पौधारोपण से हुई। न्यायाधीशों और प्रशासनिक अधिकारियों ने पौधे लगाए और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम में एडीजे आदित्य रावत, एडीजे अनीता खजुरिया, आयुषी गुप्ता, यतीस अग्रवाल, प्राची गौरव सहित न्यायाधीशगण, एसडीएम नीलेश शर्मा, सीएमओ सुरेखा जाटव, अधिवक्ता संघ के सचिव पारस जैन सहित अधिकारी, जनप्रतिनिधि और अन्य लोग मौजूद रहे।
लेकिन इसी बीच नगरपालिका के राजस्व अमले ने अपना अलग अभियान चला रखा था—बकाया वसूली का।
नतीजा सामने है—एक दिन में करीब 33 लाख रुपये नगरपालिका के खाते में।
पहले नोटिस, फिर लोक अदालत... लेकिन पेनल्टी पर राहत गायब
लोक अदालत से पहले सीएमओ सुरेखा जाटव ने नगरपालिका की दुकानों पर जाकर बकायादार दुकानदारों को नोटिस दिए थे। बकाया जमा नहीं करने पर दुकान सील करने की चेतावनी भी दी गई।
इसके बाद कई दुकानदार भुगतान के लिए पहुंचे।
व्यापारियों को उम्मीद थी कि लोक अदालत में आए हैं तो बकाया पर कुछ राहत जरूर मिलेगी। लेकिन ऑनलाइन पोर्टल पर जब 6.25 प्रतिशत पेनल्टी जुड़ी दिखाई दी तो सवाल खड़ा हो गया—
लोक अदालत में राहत है तो पेनल्टी में राहत क्यों नहीं?
यही सवाल शनिवार को कई व्यापारियों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
व्यापारियों का दर्द: किराया बढ़ा, टैक्स बढ़ा... ऊपर से पेनल्टी!
व्यापारियों का कहना है कि नगरपालिका की दुकानों के किराये और कमर्शियल टैक्स में पहले ही वृद्धि हो चुकी है। ऐसे में बढ़ी हुई मूल राशि पर अतिरिक्त पेनल्टी उनके लिए दोहरी मार है।
व्यापारियों की नाराजगी केवल 6.25 प्रतिशत की पेनल्टी को लेकर नहीं है। असली सवाल यह है कि जब राहत की उम्मीद लेकर लोक अदालत में पहुंचे, तो राहत का रास्ता कहां है?
असली पेच: पोर्टल भोपाल का, जवाब इटारसी से!
नगरपालिका से जुड़े सूत्रों के मुताबिक ऑनलाइन पोर्टल शासन स्तर से नियंत्रित है। स्थानीय नगरपालिका अपने स्तर पर पोर्टल में दर्ज पेनल्टी या देय राशि को मनमाने ढंग से कम नहीं कर सकती।
यानी स्थानीय स्तर पर स्थिति कुछ ऐसी है—
व्यापारी नगरपालिका के सामने, नगरपालिका पोर्टल के सामने और पोर्टल शासन के सामने।
पेनल्टी हटानी है तो शासन का आदेश चाहिए और आदेश के बाद पोर्टल में बदलाव।
नगरपालिका की ओर से शासन को पेनल्टी में राहत के जनवरी से पहले राहलिए पत्र भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है।
जनवरी से पहले राहत  की उम्मीद... लेकिन तब तक?
राजस्व एवं संपत्ति विभाग की सभापति एवं वार्ड क्रमांक 13 की पार्षद अमृता मनीष ठाकुर ने व्यापारियों को बताया कि विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा ने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों से इस संबंध में चर्चा की है।
अधिकारियों की ओर से जनवरी से पहले पेनल्टी में छूट के लिए पोर्टल खोले जाने की संभावना बताई गई है।
अब सवाल यह है कि जिन व्यापारियों पर आज भुगतान का दबाव है, वे जनवरी तक इंतजार करें या पेनल्टी सहित राशि जमा करें?
और अगर अभी जमा कर दी तो बाद में मिलने वाली राहत का क्या होगा?
व्यापारियों के लिए यही सबसे बड़ा संशय है।
अधिवक्ता रमेश साहू ने साधा निशाना
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी लीगल सेल के पूर्व संगठन सचिव एवं अधिवक्ता रमेश साहू ने नगरपालिका की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोक अदालत का मूल उद्देश्य लोगों को राहत देना है। ऐसे में यदि दुकानदारों को पेनल्टी सहित राशि जमा करनी पड़ रही है तो लोक अदालत की भावना प्रभावित होती है।
उनका कहना है कि नगरपालिका को यदि पहले से पता था कि पोर्टल शासन के नियंत्रण में है, तो व्यापारियों को नोटिस देने से पहले शासन स्तर पर पेनल्टी माफी की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए थी।
उन्होंने प्रदेश सरकार और नगर पालिका अध्यक्ष से तत्काल पोर्टल खुलवाकर पेनल्टी माफ करने की मांग की है।
साथ ही जिन व्यापारियों ने पेनल्टी सहित राशि जमा कर दी है, उनकी अतिरिक्त राशि को आगामी किराये या टैक्स में समायोजित करने की मांग भी उठाई है।
7.80 करोड़ की मांग, 1.41 करोड़ की वसूली... अभी 6.39 करोड़ बाकी
नगरपालिका के उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक मार्च 2026 तक संपत्ति कर, दुकान किराया और अन्य करों की कुल मांग ₹7 करोड़ 80 लाख 52 हजार 593 रुपये थी।
मार्च 2026 से 12 सितंबर 2026 तक विभिन्न मदों में करीब ₹1 करोड़ 41 लाख की वसूली की जा चुकी है।
इसके बावजूद करीब ₹6 करोड़ 39 लाख 52 हजार 593 रुपये की राशि अभी वसूली के लिए बाकी है।
यानी नगरपालिका के सामने राजस्व वसूली की बड़ी चुनौती है और व्यापारियों के सामने बढ़ते बकाया, किराये-टैक्स की राशि और पेनल्टी का दबाव।
--------------------
हमारा निशाना | सवाल पेनल्टी का ही नहीं, व्यवस्था का है
लोक अदालत में 33 लाख रुपये की वसूली नगरपालिका के लिए निश्चित रूप से अच्छी खबर है। लेकिन राजस्व जुटाने और राहत देने के बीच संतुलन भी जरूरी है।
अगर शासन का पोर्टल ही पेनल्टी तय करता है तो स्थानीय निकाय के पास विकल्प सीमित हो सकते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या व्यापारियों को नोटिस देने और लोक अदालत में बुलाने से पहले राहत की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जा सकती थी?
दूसरा सवाल—अगर जनवरी से पहले पेनल्टी माफी की संभावना है तो अभी भुगतान करने वाले व्यापारियों के हितों की सुरक्षा कैसे होगी?
और तीसरा सवाल सबसे बड़ा—
लोक अदालत का लक्ष्य सिर्फ बकाया वसूलना है या विवाद और बोझ दोनों कम करना भी?
इटारसी के व्यापारियों को अब सिर्फ आश्वासन नहीं, स्पष्ट शासनादेश और पोर्टल पर दिखाई देने वाली वास्तविक राहत चाहिए।
क्योंकि व्यापारी का सवाल सीधा है—
“जब राहत की उम्मीद में लोक अदालत आए थे, तो बिल में पेनल्टी क्यों मिली?”
हमारा निशाना सवाल उठाता रहेगा—राजस्व भी चाहिए, लेकिन राहत और पारदर्शिता की कीमत पर नहीं।