नर्मदापुरम/इटारसी।
सरकार ने मोहल्ले में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने के लिए संजीवनी क्लीनिक के भवन तो तैयार कर दिए, लेकिन व्यवस्था की सबसे जरूरी कड़ी—मरीजों का इलाज—अब तक शुरू नहीं हो सकी। इटारसी में करीब डेढ़ साल से तीन संजीवनी क्लीनिक भवन तैयार होकर बंद पड़े हैं, जबकि चौथा भवन न्यास कॉलोनी में लगभग तैयार होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के हैंडओवर का इंतजार कर रहा है।प्राप्त जानकारी के मुताबिक मामले का सबसे बड़ा आंकड़ा यह है कि नर्मदापुरम विधानसभा क्षेत्र में प्रत्येक संजीवनी क्लीनिक के निर्माण पर ₹25 लाख की लागत निर्धारित है।   यानी इटारसी के तीन तैयार भवनों की निर्माण लागत को इसी मानक से देखें तो करीब ₹75 लाख की सार्वजनिक राशि से तैयार ढांचा फिलहाल मरीजों के उपयोग में नहीं है। यह केवल निर्माण लागत का हिसाब है; जमीन, बिजली, उपकरण, दवाइयां और संचालन पर होने वाला खर्च इसमें शामिल नहीं है।
₹75 लाख का ढांचा, मरीजों को सेवा नहीं
तीन भवन तैयार हैं। करीब डेढ़ साल से ताले लगे हैं। यानी यदि तीनों भवनों की लागत ₹25-25 लाख मानी जाए तो ₹75 लाख की निर्माण परिसंपत्ति का अपेक्षित स्वास्थ्य उपयोग शुरू नहीं हो सका है।
चौथे भवन की स्थिति अलग है। वह लगभग तैयार है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने उसका हैंडओवर नहीं लिया है। इस तरह इटारसी में प्रस्तावित चार क्लीनिकों में से तीन तैयार होकर बंद और एक हैंडओवर की प्रक्रिया में है।
हर क्लीनिक को चाहिए 6 कर्मचारी
मध्यप्रदेश विधानसभा में सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार एक संजीवनी क्लीनिक के लिए 6 कर्मचारियों की आवश्यकता होती है—
1 चिकित्सा अधिकारी, 1 नर्सिंग ऑफिसर, 1 फार्मासिस्ट, 1 डाटा एंट्री ऑपरेटर और 2 सपोर्ट स्टाफ।
इस हिसाब से इटारसी के तीन तैयार क्लीनिकों को पूरी तरह चलाने के लिए कुल 18 कर्मचारियों की जरूरत होगी।
यानी तीन भवनों की चाबी तैयार है, लेकिन मरीज देखने के लिए आवश्यक मानव संसाधन की पूरी व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी।
पहले भवन की डिजाइन, अब स्टाफ और बिजली
इन क्लीनिकों की कहानी एक ही समस्या पर नहीं रुकी। शुरुआत में भवन की संरचना, रैंप और सीढ़ियों की डिजाइन जैसी कमियों के कारण स्वास्थ्य विभाग ने हैंडओवर लेने में आपत्ति की। बाद में भवन हैंडओवर हुए तो संचालन के लिए डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और बिजली कनेक्शन की जरूरत सामने आ गई।
अस्पताल अधीक्षक के अनुसार तीन क्लीनिकों के बिजली मीटर कनेक्शन के लिए आवेदन किए गए हैं और आवश्यक स्टाफ की मांग संचालनालय को भेजी गई है। स्टाफ और बिजली कनेक्शन मिलने के बाद ही संचालन शुरू होने की बात कही गई है।
प्रदेश की व्यवस्था का आंकड़ा भी सवाल खड़ा करता है
विधानसभा के रिकॉर्ड में सामने आया है कि प्रदेश के संजीवनी क्लीनिकों में मानव संसाधन की कमी कई जगह संचालन में बाधा बनी है। दिसंबर 2024 के एक विधानसभा उत्तर में 60 स्वीकृत संजीवनी क्लीनिकों में से 28 के संचालित नहीं होने की जानकारी दी गई थी। इनमें 20 संस्थाएं मानव संसाधन की पदस्थापना न होने और 8 संस्थाएं निर्माण कार्य पूरा नहीं होने के कारण शुरू नहीं हो सकी थीं।
इससे इटारसी का मामला केवल स्थानीय स्तर की देरी नहीं, बल्कि भवन निर्माण और मानव संसाधन की तैयारी के बीच तालमेल के बड़े सवाल से भी जुड़ता है।
योजना में सुविधा कितनी, जमीन पर इंतजार कितना?
संजीवनी क्लीनिक का उद्देश्य सामान्य बीमारी के उपचार, प्राथमिक जांच और दवाओं की सुविधा लोगों को उनके मोहल्ले में उपलब्ध कराना है। योजना के तहत क्लीनिकों में निःशुल्क जांच और दवाओं जैसी सुविधाएं देने का प्रावधान है।
लेकिन इटारसी में सवाल सुविधाओं की सूची का नहीं, उनके शुरू होने का है।

हमारा निशाना का सवाल 
सरकारी स्वास्थ्य योजना में भवन निर्माण पहला कदम है, आखिरी नहीं। अगर भवन बनने के बाद डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट, बिजली, दवा और उपकरण की व्यवस्था के लिए अलग से महीनों इंतजार करना पड़े, तो योजना की तैयारी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इटारसी के तीन संजीवनी क्लीनिकों में ₹75 लाख के भवन तैयार हैं। अब जनता का सवाल सिर्फ इतना है—इन तालों की चाबी कब घूमेगी और मरीजों के लिए डॉक्टर कब बैठेंगे?