मध्य प्रदेश कांग्रेस में दिवाली से पहले संगठनात्मक फेरबदल की तैयारी है। निष्क्रिय पदाधिकारी हटेंगे, नई नियुक्तियां होंगी। 310 सदस्यीय कार्यकारिणी और 59 विभाग-प्रकोष्ठों पर नजर।
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठन को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। दिवाली से पहले प्रदेश कांग्रेस में बड़े फेरबदल की तैयारी है। लेकिन इस बार पूरी प्रदेश कार्यकारिणी को भंग कर नई टीम खड़ी करने के बजाय निष्क्रिय पदाधिकारियों की छंटनी कर उनकी जगह सक्रिय नेताओं को जिम्मेदारी देने की रणनीति बनाई जा रही है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी की कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ संगठन में नियुक्तियों को लेकर चर्चा हो चुकी है। अब पटवारी को सभी पहलुओं और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नियुक्तियों के प्रस्ताव तैयार कर भेजने को कहा गया है।
पूरी कार्यकारिणी भंग करने का फैसला अब बदला
दिलचस्प यह है कि अगस्त में भोपाल में हुई प्रदेश कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (पीएसी) की बैठक में प्रदेश कार्यकारिणी को भंग करने का निर्णय लिया गया था। लेकिन दिल्ली में हुई संगठन की समीक्षा के बाद रणनीति में बदलाव किया गया।
समीक्षा में यह बात सामने आई कि प्रदेश कार्यकारिणी के बड़ी संख्या में पदाधिकारी अपेक्षित रूप से सक्रिय नहीं हैं। ऐसे में अब संगठन को पूरी तरह रीसेट करने के बजाय ‘काम नहीं तो पद नहीं’ के फार्मूले पर निष्क्रिय चेहरों को हटाकर नए और सक्रिय नेताओं को जगह देने की तैयारी है।
अक्टूबर 2024 में घोषित प्रदेश कार्यकारिणी में करीब 310 पदाधिकारी शामिल किए गए थे। अब इसी बड़े कुनबे में छंटनी की तैयारी है।
59 विभाग-प्रकोष्ठ भंग, दो महीने से संगठन की रफ्तार थमी
कांग्रेस पहले ही अपने 59 विभागों और प्रकोष्ठों को भंग कर चुकी है। अगस्त में दिल्ली में हुई समीक्षा के दौरान इनके प्रदर्शन को संतोषजनक नहीं माना गया था।
नतीजा यह है कि प्रदेश कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे का एक बड़ा हिस्सा पिछले करीब दो महीने से पुनर्गठन के इंतजार में है। नई नियुक्तियों में क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों के साथ-साथ आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी को भी ध्यान में रखने की बात कही जा रही है।
आठ महीने से कांग्रेस को प्रदेश प्रवक्ता तक नहीं मिला
संगठन में बदलाव की सबसे बड़ी तस्वीर मीडिया विभाग में दिखाई देती है। मध्य प्रदेश कांग्रेस पिछले करीब आठ महीने से बिना प्रदेश प्रवक्ताओं के काम कर रही है।
फरवरी में पूर्व प्रवक्ताओं को पदमुक्त कर दिया गया था। इसके बाद नए प्रवक्ताओं के चयन के लिए टैलेंट हंट शुरू हुआ। पहला चरण मार्च में पूरा हुआ, जबकि दूसरा चरण मई में पूरा किया गया। 13 मई को प्रतिभागियों के अंतिम इंटरव्यू भी हो चुके हैं।
पार्टी ने करीब 20 प्रदेश प्रवक्ता, मीडिया पैनलिस्ट और जिला प्रवक्ताओं के चयन की प्रक्रिया पूरी की, लेकिन तीन महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी नामों की घोषणा नहीं हुई।
ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि जब कांग्रेस चुनावी मैदान में भाजपा से मुकाबले की तैयारी का दावा कर रही है, तब उसकी अपनी मीडिया टीम ही इतने लंबे समय से अधूरी क्यों है?
‘पितृ पक्ष’ के बाद खुलेगा नियुक्तियों का पिटारा
मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक के मुताबिक फिलहाल पितृ पक्ष चल रहा है और इसके बाद नए प्रवक्ताओं की घोषणा कर दी जाएगी।
यानी कांग्रेस के संगठनात्मक पुनर्गठन की तस्वीर अब त्योहारों के आसपास साफ होने की उम्मीद है। प्रदेश कार्यकारिणी, विभाग-प्रकोष्ठ और मीडिया टीम में होने वाली नियुक्तियां यह भी तय करेंगी कि पार्टी आगामी चुनावी लड़ाई के लिए पुराने चेहरों पर भरोसा करती है या नई टीम को मैदान में उतारकर संगठन में नई जान फूंकने की कोशिश करती है।
असल सवाल: बदलाव चेहरों का होगा या काम करने के तरीके का?
कांग्रेस के सामने चुनौती सिर्फ पद भरने की नहीं है। असली चुनौती निष्क्रिय संगठन को सक्रिय संगठन में बदलने की है।
अगर नई नियुक्तियां केवल क्षेत्रीय और गुटीय संतुलन साधने तक सीमित रहीं, तो 310 सदस्यीय कार्यकारिणी से निकले पुराने सवाल फिर खड़े होंगे। लेकिन यदि इस बार सक्रियता, जमीनी पकड़ और चुनावी क्षमता को प्राथमिकता मिली, तो दिवाली से पहले होने वाला यह फेरबदल कांग्रेस के लिए महज संगठन विस्तार नहीं, बल्कि चुनावी मोड में जाने का पहला बड़ा संकेत साबित हो सकता है।
Continue With Google
Comments (0)