भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा अब धीरे-धीरे चुनावी मोड में आती दिखाई दे रही है। संगठन को मजबूत करने के साथ पार्टी ने उन विधानसभा क्षेत्रों पर भी फोकस बढ़ा दिया है, जहां पिछले विधानसभा चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा था या जीत का अंतर बेहद कम रहा था। भाजपा ने ऐसी 66 सीटों के लिए अलग रणनीति तैयार करने की कवायद शुरू कर दी है।
पार्टी के नए प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देव इस रणनीति को जमीन पर उतारने के लिए नवरात्रि में मध्यप्रदेश के दौरे पर रहेंगे। विदेश प्रवास से लौटने के बाद उनका फोकस भोपाल से ज्यादा उन क्षेत्रों पर रहने की संभावना है, जहां संगठन कमजोर है या स्थानीय नेताओं के बीच खींचतान पार्टी के लिए चुनौती बनी हुई है।
66 सीटें क्यों बनीं भाजपा की चिंता?
हाल ही में प्रदेश भाजपा के कोर ग्रुप और संभागीय व जिला प्रभारियों की बैठकों में 2023 में हारी हुई 66 सीटों और पांच हजार से कम अंतर से जीती सीटों को लेकर मंथन हुआ था। इसके बाद इन विधानसभा क्षेत्रों के लिए अलग रणनीति तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
पार्टी का लक्ष्य सिर्फ चुनाव के समय सक्रिय होना नहीं, बल्कि अभी से इन क्षेत्रों में संगठन, जनसंपर्क और स्थानीय समीकरणों को मजबूत करना है।
कौन किससे नाराज? बनेगी नेताओं की ‘लिस्ट’
भाजपा संगठन के सामने सबसे बड़ी चुनौती कई क्षेत्रों में आपसी गुटबाजी और वर्चस्व की लड़ाई है। सूत्रों के अनुसार बिप्लब देव ने प्रदेश नेतृत्व से ऐसे नेताओं की क्षेत्रवार सूची मांगी है, जिनके बीच आपसी मनमुटाव या राजनीतिक टकराव है।
इन नेताओं को आवश्यकता के अनुसार दिल्ली बुलाकर बातचीत कराने और मतभेद दूर करने की कोशिश की जा सकती है। इसके बावजूद यदि टकराव जारी रहा तो संगठनात्मक कार्रवाई भी संभव है।
यानी कमजोर सीटों पर भाजपा का प्लान सिर्फ वोट बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पहले संगठन के भीतर की लड़ाई खत्म करने पर जोर रहेगा।
प्रदेश भाजपा टीम में भी होगा बदलाव?
संगठन स्तर पर कुछ पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव की संभावना भी जताई जा रही है। खासतौर पर ऐसे पदाधिकारी जो निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं और संगठन को अपेक्षित समय नहीं दे पा रहे हैं, उनकी जगह युवाओं को जिम्मेदारी देने पर विचार हो सकता है।
इस मामले में प्रदेश प्रभारी बिप्लब देव नए प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर, प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा कर सकते हैं।
आदिवासी सीटों पर भी बड़ा फोकस
भाजपा आने वाले समय में आदिवासी बहुल विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की तैयारी में है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ संघ विचारधारा से जुड़े नेताओं को भी इन क्षेत्रों में सक्रिय किए जाने की संभावना है।
इन इलाकों में संगठन की जमीनी स्थिति, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और स्थानीय मुद्दों का फीडबैक जुटाया जाएगा।
भोपाल की कुर्सी से ज्यादा मैदान में दिखेंगे बिप्लब
सूत्रों के मुताबिक विदेश दौरे से लौटने के बाद बिप्लब कुमार देव का ज्यादा समय भोपाल के बजाय प्रदेश के मैदानी दौरे में बीत सकता है।
वे कमजोर क्षेत्रों में दो-तीन दिन तक रुककर स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कर सकते हैं। पार्टी को उम्मीद है कि इस दौरान मिलने वाला जमीनी फीडबैक आगामी निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
नवरात्रि में बदल सकता है BJP का कोर ग्रुप
नवरात्रि के दौरान प्रदेश भाजपा के कोर ग्रुप के विस्तार और पुनर्गठन की भी चर्चा है। मौजूदा सदस्यों में कुछ को बाहर कर नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है।
खास तौर पर चुनावी रणनीति और प्रशासनिक अनुभव रखने वाले नेताओं को कोर ग्रुप में जगह दिए जाने की संभावना है। ऐसे नेताओं पर भी नजर है जिनके पास फिलहाल कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं है।
हर दो महीने में मोर्चा-प्रकोष्ठों का हिसाब
संगठन ने मोर्चों और प्रकोष्ठों को भी सक्रिय करने की तैयारी की है। उनकी गतिविधियों की हर दो महीने में समीक्षा किए जाने की योजना है।
संदेश साफ है—पद मिला है तो मैदान में दिखना भी होगा। भाजपा चाहती है कि मोर्चा और प्रकोष्ठ किसी चुनाव के इंतजार के बजाय लगातार जनता के बीच सक्रिय रहें।
भाजपा का नया फॉर्मूला: कमजोर सीट, कमजोर संगठन और गुटबाजी—तीनों पर एक साथ वार
66 कमजोर सीटों की पहचान, नाराज नेताओं की सूची, संगठन में संभावित फेरबदल, आदिवासी क्षेत्रों पर फोकस और प्रभारी के लगातार मैदानी दौरे—इन तैयारियों से साफ है कि भाजपा ने अगले चुनाव का इंतजार करने के बजाय अभी से जमीन तैयार करने की रणनीति शुरू कर दी है।
66 कमजोर सीटों पर BJP का ‘अलग प्लान’, नाराज नेताओं की बनेगी सूची; नवरात्रि में मैदान में उतरेंगे बिप्लब देव
विदेश से लौटते ही प्रदेश प्रभारी का फोकस भोपाल से ज्यादा मैदानी दौरे पर, कमजोर सीटों पर खुद करेंगे नेताओं-कार्यकर्ताओं से संवाद
Continue With Google
Comments (0)