भोपाल। सीहोर जिले के बुधनी के कोसमी गांव में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब सरकार के लिए असहज राजनीतिक सवाल बन गई है। आदिवासी ग्रामीणों के घर तोड़ने और उनकी खेती उजाड़ने के आरोपों के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ही कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल को जांच के निर्देश दिए हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी गलती मिलने पर कार्रवाई का भरोसा दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जब वन विभाग अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को नियमानुसार बता रहा है, तब केंद्रीय मंत्री को विरोध क्यों करना पड़ा? क्या कार्रवाई के दौरान नियमों और मानवीय पहलुओं का पर्याप्त ध्यान रखा गया? और यदि सब कुछ नियमानुसार हुआ है, तो सरकार को जांच की जरूरत क्यों महसूस हुई? अब इन सवालों का जवाब जांच रिपोर्ट से ही मिलेगा।
शिवराज के विरोध से बढ़ा सियासी दबाव
कोसमी गांव में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के दौरान आदिवासी ग्रामीणों के मकान गिराने और खेती नष्ट करने की कार्रवाई का शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को विरोध किया था। शिवराज का इस मामले में हस्तक्षेप राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्र उनकी पुरानी राजनीतिक कर्मभूमि और प्रभाव वाले इलाके से जुड़ा है।
शिवराज के विरोध के बाद मामला केवल वन विभाग की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकार के प्रशासनिक रवैये पर भी सवाल उठने लगे। मुख्यमंत्री को जांच के निर्देश देने पड़े और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को भी यह कहना पड़ा कि गलती मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
मुख्यमंत्री का भरोसा, लेकिन सवाल बरकरार
सोमवार को भोपाल में पत्रकारों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है और मुख्य सचिव को जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि उनके वरिष्ठ नेता ने कोई बात उठाई है, तो उसकी जांच कराने में कोई बुराई नहीं है।
मुख्यमंत्री का बयान बताता है कि सरकार शिकायत को नजरअंदाज करने के बजाय उसकी जांच कराने के पक्ष में है। लेकिन असली सवाल यह है कि जांच में केवल वन भूमि पर अतिक्रमण की स्थिति देखी जाएगी या कार्रवाई के तरीके, ग्रामीणों को हुए नुकसान और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल होगी?
वन विभाग के दावे बनाम आदिवासियों का नुकसान
वन विभाग का दावा है कि ग्रामीणों ने वन भूमि पर अतिक्रमण कर खेती शुरू कर दी थी और पौधरोपण को नुकसान पहुंचाया था। विभाग के अनुसार, अतिक्रमण हटाने के लिए कई बार नोटिस भी दिए गए, लेकिन ग्रामीण जमीन खाली करने के लिए तैयार नहीं हुए।
दूसरी ओर, कार्रवाई के विरोध में उठी आवाजों में आदिवासियों के घरों को गिराने और खेती नष्ट करने का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है।
ऐसे में जांच का केंद्र यह होना चाहिए कि जमीन की वास्तविक स्थिति क्या थी, नोटिस और कार्रवाई की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं तथा कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवारों के अधिकारों और परिस्थितियों का ध्यान रखा गया या नहीं।
अतिक्रमण पर कार्रवाई का अधिकार अपनी जगह है, लेकिन कार्रवाई की वैधता और उसका तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
खंडेलवाल का बयान: गलती हुई तो सरकार कदम उठाएगी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री से उनकी बात हुई है। यदि कहीं गलती हुई है, तो सरकार नियमानुसार सही कदम उठाएगी।
उनका बयान भी इस मामले में महत्वपूर्ण है। पार्टी नेतृत्व ने कार्रवाई को आंख मूंदकर सही ठहराने के बजाय जांच और संभावित गलती पर कार्रवाई की बात कही है। इससे स्पष्ट है कि सरकार और संगठन मामले को हल्के में लेने के पक्ष में नहीं हैं।
हालांकि, जांच के नतीजे आने तक यह तय नहीं माना जा सकता कि वन विभाग की कार्रवाई गलत थी या ग्रामीणों के आरोप पूरी तरह सही हैं।
ओबीसी आरक्षण पर भी सरकार की प्रतीक्षा
मुख्यमंत्री ने ओबीसी आरक्षण पर कहा कि सरकार मामले का परीक्षण करा रही है। हाईकोर्ट द्वारा 27 प्रतिशत आरक्षण को अस्वीकार किए जाने के बाद न्यायालय से नई व्यवस्था आने तक सरकारी नौकरियों में ओबीसी वर्ग को 14 प्रतिशत आरक्षण ही मिलेगा।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
कोसमी का मामला सरकार के सामने दोहरी चुनौती लेकर आया है। एक ओर वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर विभाग के दावों की जांच जरूरी है, तो दूसरी ओर आदिवासी परिवारों को हुए नुकसान और कार्रवाई की निष्पक्षता पर उठे सवालों का जवाब भी देना होगा।
अब देखना यह है कि जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है या जिम्मेदारी भी तय होती है। क्योंकि सवाल सिर्फ वन भूमि से अतिक्रमण हटाने का नहीं, बल्कि यह भी है कि कानून लागू करते समय कहीं कमजोर तबके के साथ अन्याय तो नहीं हुआ ।
शिवराज के सवाल पर सरकार की जांच, बुधनी में अतिक्रमण पर भाजपा में ही असहजता!
कोसमी में आदिवासियों के घर तोड़ने और फसल उजाड़ने की कार्रवाई पर केंद्रीय मंत्री ने उठाई आवाज, मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को सौंपी जांच; खंडेलवाल बोले—गलती हुई तो
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