भोपाल /
मोबाइल और सोशल मीडिया की दुनिया में सक्रिय जेन-जी (Gen Z) को अब कानून, नागरिक जिम्मेदारियों और डिजिटल सुरक्षा का पाठ पढ़ाने की तैयारी है। मध्यप्रदेश में पुलिस और उच्च शिक्षा विभाग मिलकर 'जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद' अभियान शुरू करने जा रहे हैं। इसके पहले चरण में पुलिस अधिकारी प्रदेश के 500 कॉलेजों और विश्वविद्यालयों तक पहुंचेंगे। कॉलेजों में 22 अक्टूबर से कार्यक्रम शुरू होने की जानकारी दी गई है।
अभियान का मकसद युवाओं को कानून के प्रति जागरूक करना, साइबर अपराधों से बचाव के तरीके समझाना और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाना है। लेकिन इस पहल का एक अहम पहलू यह भी है कि कॉलेजों में छात्र-छात्राओं के साथ संवाद के लिए नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जिसके जरिए पुलिस को अपराधों और मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ी सूचनाएं भी मिल सकेंगी।
यानी अब कॉलेज सिर्फ पढ़ाई और करियर की तैयारी का केंद्र नहीं होंगे, बल्कि कानून, सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारियों पर पुलिस के सीधे संवाद का मंच भी बनेंगे।
आठ क्रेडिट कोर्स से कानून की समझ, पढ़ाई के साथ पुलिसिंग का पाठ
उच्च शिक्षा विभाग ने युवाओं को कानून और नागरिक कर्तव्यों से जोड़ने के लिए आठ क्रेडिट कोर्स तैयार किए हैं। उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त प्रबल सिपाहा के अनुसार, इनमें से चार क्रेडिट कोर्स के माध्यम से विद्यार्थी अपनी नियमित पढ़ाई के साथ पुलिसिंग और कानूनी मामलों को समझ सकेंगे।
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए भोपाल के एनआईटीटीटीआर में शनिवार को प्रोफेसरों और पुलिस अधिकारियों का प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि युवाओं तक कानून की जानकारी कठिन शब्दावली के बजाय सहज और सरल भाषा में पहुंचाई जाए।
युवाओं को केवल अपराध होने के बाद पुलिस तक पहुंचने की जानकारी देना ही पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें यह भी समझाना होगा कि अपराध से बचाव कैसे करें, अपने अधिकारों का इस्तेमाल कैसे करें और किसी गैरकानूनी गतिविधि की जानकारी मिलने पर जिम्मेदारी से क्या कदम उठाएं।
साइबर ठगी, नशा और मानसिक तनाव पर फोकस
डिजिटल दुनिया में बढ़ते जोखिमों को देखते हुए अभियान में साइबर ठगी और डिजिटल सुरक्षा को प्रमुखता दी जाएगी। छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने, डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित इस्तेमाल करने और संदिग्ध गतिविधियों को पहचानने की जानकारी दी जाएगी।
इसके अलावा नशे के दुष्प्रभाव, मानसिक तनाव से निपटने के तरीके और आपातकालीन परिस्थितियों में मदद हासिल करने के विकल्प भी समझाए जाएंगे। विद्यार्थियों को डायल-112 ऐप की सेवाओं की जानकारी देने की भी योजना है।
प्रशिक्षण के दौरान पुलिस में रविवार को होने वाले मेडिटेशन की तर्ज पर विद्यार्थियों की एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए 'ब्राइटर माइंड्स' पहल का भी उल्लेख किया गया।
हर लेज में बकॉनेगा नेटवर्क, पुलिस तक पहुंचेगी अपराधों की सूचना
अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कॉलेजों में पुलिस और विद्यार्थियों के बीच संपर्क व्यवस्था तैयार करना है। पुलिस अधिकारी अपने थाना क्षेत्रों के कॉलेजों के साथ समन्वय स्थापित करेंगे। इसके लिए सोशल मीडिया समूह बनाए जाने की योजना है, जिनके जरिए छात्र-छात्राएं अपनी समस्याएं पुलिस और महिला थानों तक पहुंचा सकेंगे।
इसी नेटवर्क के माध्यम से आसपास होने वाले अपराधों और मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ी सूचनाएं भी पुलिस तक पहुंचाई जा सकेंगी।
यह व्यवस्था एक ओर विद्यार्थियों को पुलिस से सीधे संवाद का अवसर दे सकती है, वहीं दूसरी ओर पुलिस को युवा वर्ग और शैक्षणिक परिसरों के आसपास की गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, ऐसे नेटवर्क की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विद्यार्थियों की शिकायतों पर कितनी तत्परता से कार्रवाई होती है और उनकी पहचान व व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता कैसे सुरक्षित रखी जाती है।
'मैं हूं अभिमन्यु' अभियान से जेंडर समानता का संदेश
युवाओं में लैंगिक समानता की समझ विकसित करने के लिए 'मैं हूं अभिमन्यु' अभियान भी चलाया जाएगा। इसके जरिए युवकों को महिलाओं के प्रति सम्मान, समानता और जिम्मेदार व्यवहार का संदेश देने की योजना है।
महिलाओं की सुरक्षा को केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित रखने के बजाय युवाओं के बीच सामाजिक सोच और व्यवहार में बदलाव लाने की कोशिश इस पहल का अहम हिस्सा होगी।
असली परीक्षा कॉलेजों में संवाद की
प्रदेश के 500 कॉलेजों और विश्वविद्यालयों तक पहुंचने की यह पहल युवाओं को कानून के प्रति जागरूक बनाने का अवसर है। साइबर अपराध, नशे और लैंगिक असमानता जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए युवाओं की भागीदारी जरूरी है।
लेकिन अभियान की सफलता केवल प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने या सोशल मीडिया समूह बनाने से तय नहीं होगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि युवाओं की समस्याओं पर पुलिस कितनी संवेदनशीलता से प्रतिक्रिया देती है, शिकायतों का निराकरण कैसे होता है और कॉलेजों में तैयार किया गया नेटवर्क कितना प्रभावी साबित होता है।
जेन-जी को कानून का पाठ पढ़ाने निकली पुलिस के सामने चुनौती दोहरी है—युवाओं को जागरूक भी करना है और उनके बीच ऐसा भरोसा भी कायम करना है, जिससे वे पुलिस को केवल वर्दी और कार्रवाई के प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि मददगार व्यवस्था के रूप में देख सकें।
(प्रतीकात्मक इमेज सोशल मीडिया के सौजन्य से)
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