भोपाल।
मध्यप्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस ने अब आंदोलन को सड़क तक ले जाने का ऐलान किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि28 सितंबर को भोपाल स्थित निर्वाचन सदन का घेराव किया जाएगा और 29 सितंबर को सभी जिला मुख्याल यों पर जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालयों का घेराव होगा।
कांग्रेस का सबसे बड़ा सवाल आंकड़ों को लेकर है। पटवारी के मुताबिक SIR से पहले प्रदेश में 5 करोड़ 74 लाख 6 हजार 143 मतदाता दर्ज थे। प्रक्रिया के दौरान 5 करोड़ 31 लाख 31 हजार 983 गणना प्रपत्र प्राप्त हुए और उनका डिजिटलीकरण किया गया। दिसंबर 2025 की ड्राफ्ट सूची में 42 लाख 74 हजार 160 नाम बाहर हुए। दावे-आपत्तियों के बाद 21 फरवरी 2026 को जारी अंतिम सूची में 5 करोड़ 39 लाख 81 हजार 65 मतदाता दर्ज हुए और कांग्रेस के अनुसार अंतिम प्रक्रिया में 34 लाख 25 हजार 78 नाम हटे।
34.25 लाख नामों का हिसाब मांग रही कांग्रेस
कांग्रेस की मांग है कि अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए 34,25,078 नामों का विधानसभा, जिला और कारणवार विवरण सार्वजनिक किया जाए। साथ ही दावे-आपत्तियों के दौरान कितने नाम वापस जोड़े गए और किन कारणों से आवेदन स्वीकार या खारिज किए गए, इसकी जानकारी भी सामने रखी जाए।
पटवारी के मुताबिक दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया में करीब 7.17 लाख लोगों ने नाम जोड़ने के लिए आवेदन किए, जबकि करीब 83 हजार नाम हटाने संबंधी आपत्तियां मिलीं। कांग्रेस इन्हीं आंकड़ों के आधार पर पूरी प्रक्रिया का विस्तृत हिसाब मांग रही है।
42.74 लाख से 34.25 लाख तक पहुंचा आंकड़ा
SIR के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा ड्राफ्ट सूची में बाहर हुए 42.74 लाख नामों को लेकर हुई थी। बाद में दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद अंतिम सूची में हटाए गए नामों का आंकड़ा 34.25 लाख रहा।
यानी ड्राफ्ट और अंतिम सूची के बीच करीब 8.49 लाख नामों का अंतर रहा। कांग्रेस का सवाल है कि इन बदलावों का विधानसभा और जिला स्तर पर पूरा विवरण सार्वजनिक क्यों न किया जाए।
चुनाव आयोग के भीतर आपत्तियों का भी मुद्दा
पटवारी ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। उनके मुताबिक ये आपत्तियां मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने-बहाल करने, फॉर्म-6 और चुनावी आईटी सिस्टम से जुड़े विषयों पर थीं। कांग्रेस इन आपत्तियों का पूरा ब्योरा और उनके निपटारे की प्रक्रिया सार्वजनिक करने की मांग कर रही है। यह संख्या और इन आपत्तियों की प्रकृति फिलहाल कांग्रेस द्वारा मीडिया रिपोर्टों के हवाले से रखे गए दावे हैं।
इस्तीफे से लेकर एफआईआर तक मांग
कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। यदि जांच में किसी आपराधिक कृत्य की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
कांग्रेस ने यह भी मांग रखी है कि वास्तविक मतदाताओं के नाम हटे हैं तो उन्हें अपना पक्ष रखने और नाम दोबारा जुड़वाने का अवसर मिले तथा चुनाव आयोग की आयुक्त चयन प्रक्रिया में बदलाव किया जाए।
अब सवाल सिर्फ प्रदर्शन का नहीं, डेटा का है
कांग्रेस के आंदोलन की असली धुरी तीन आंकड़े बन गए हैं—
5.74 करोड़ — SIR से पहले मतदाता
42.74 लाख — ड्राफ्ट सूची में बाहर हुए नाम
34.25 लाख — अंतिम प्रक्रिया में हटाए गए नाम
इसके साथ 7.17 लाख नाम जोड़ने के आवेदन और करीब 83 हजार नाम हटाने की आपत्तियां भी कांग्रेस के सवालों का आधार हैं।
अब कांग्रेस इन आंकड़ों को लेकर निर्वाचन सदन से जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय तक जवाब मांगने जा रही है।
28 और 29 सितंबर का कार्यक्रम
28 सितंबर: भोपाल में निर्वाचन सदन का घेराव
29 सितंबर: सभी जिलों में जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालयों का घेराव
मतदाता सूची पर शुरू हुआ विवाद अब आंकड़ों से सड़क तक पहुंच गया है। कांग्रेस का दावा है कि जब तक उसके सवालों का जवाब नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।
हमारा निशाना:
मतदाता सूची में नाम किसी संख्या का हिस्सा नहीं, मतदान के अधिकार का आधार है। इसलिए बहस आरोपों से आगे बढ़कर आंकड़ों और रिकॉर्ड पर हो—कितने नाम हटे, क्यों हटे, कितने वापस जुड़े और किस आधार पर फैसला हुआ? यही वह पूरा हिसाब है, जिस पर अब राजनीतिक घमासान तेज होने वाला है।
34.25 लाख नाम हटे, अब चुनाव आयोग से हिसाब मांगेगी कांग्रेस
28 को भोपाल में निर्वाचन सदन घेराव, 29 को जिलों में प्रदर्शन
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