भोपाल। मध्य प्रदेश में अगले साल होने वाले पंचायत चुनावों से पहले गांव की सरकार चलाने के नियमों में बदलाव की तैयारी है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के संकेतों के मुताबिक, प्रदेश में अगले महीने पंचायत राज व्यवस्था में परिवर्तन किया जा सकता है। इसके तहत पंचायत समितियों को टैक्स लगाने सहित कुछ अन्य अधिकार देने पर विचार किया जा रहा है। इन फैसलों के अनुमोदन में ग्रामसभा की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।
इस संभावित बदलाव का असर केवल पंचायतों के प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांवों में स्थानीय स्तर पर फैसले लेने की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है। हालांकि, अधिकारों का वास्तविक स्वरूप और नई व्यवस्था के नियम सामने आने के बाद ही इसकी पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
चुनाव से पहले क्यों अहम है यह बदलाव?
प्रदेश में पंचायत चुनाव वर्ष 2022 में हुए थे। पांच साल का कार्यकाल वर्ष 2027 में पूरा होना है। ऐसे में अगले साल अप्रैल-मई में चुनाव कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, चुनाव की तारीखों को लेकर अंतिम कार्यक्रम घोषित होना बाकी है।
मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बालाघाट जिले के वारासिवनी जनपद की ग्राम पंचायत गर्रा में आयोजित सरपंच सम्मेलन में पंचायत राज व्यवस्था में बदलाव के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि चुनाव के लिए एक जनवरी 2027 की स्थिति में तैयार होने वाली मतदाता सूची का उपयोग किया जाएगा।
इस लिहाज से आगामी चुनाव केवल नए सरपंचों और पंचायत प्रतिनिधियों के चयन का मामला नहीं होंगे। चुनाव से पहले पंचायतों के अधिकारों और निर्णय लेने की प्रक्रिया में प्रस्तावित बदलाव भी महत्वपूर्ण होंगे।
टैक्स लगाने का अधिकार मिला तो बदल सकता है पंचायतों का कामकाज
प्रस्तावित बदलाव में पंचायत समितियों को टैक्स लगाने सहित अन्य अधिकार दिए जाने की बात कही गई है। इन फैसलों के अनुमोदन में ग्रामसभा की भूमिका रहेगी।
फिलहाल, ग्रामसभा को पंचायत व्यवस्था में महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त हैं। लेकिन गांवों में किसी नए टैक्स या दूसरे बदलाव पर सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सरकार की ओर से प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य पंचायत स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना बताया जा रहा है।
यदि पंचायतों को स्थानीय संसाधनों से जुड़े फैसले लेने के अधिक अधिकार मिलते हैं, तो पंचायतों की वित्तीय भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। दूसरी ओर, टैक्स लगाने जैसे फैसलों में ग्रामीणों की सहमति, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा।
नई व्यवस्था में पंचायत समितियों को कौन-कौन से अधिकार मिलेंगे और ग्रामसभा के अनुमोदन की प्रक्रिया किस तरह लागू होगी, यह नियमों में बदलाव के बाद ही स्पष्ट होगा।
52 जिला पंचायतों से लेकर 23 हजार से ज्यादा ग्राम पंचायतों तक असर
मध्य प्रदेश में पंचायत राज व्यवस्था का दायरा बड़ा है। प्रदेश में 52 जिला पंचायतें, 313 जनपद पंचायतें और 23 हजार से अधिक ग्राम पंचायतें हैं। पंचायत राज व्यवस्था में होने वाला बदलाव इस पूरे ढांचे के कामकाज को प्रभावित कर सकता है।
इसलिए प्रस्तावित परिवर्तन का महत्व केवल चुनावी तैयारी तक सीमित नहीं है। यह भी देखना होगा कि नए नियमों से पंचायतों की निर्णय लेने की क्षमता, वित्तीय संसाधनों और ग्रामसभा की भागीदारी में कितना बदलाव आता है।
नगरीय निकायों के चुनाव भी 2027 में
प्रदेश में नगरीय निकायों का कार्यकाल भी अगस्त 2027 में पूरा होना है। राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद के चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, नगरीय निकायों की मतदाता सूची तैयार हो चुकी है।
इस तरह वर्ष 2027 मध्य प्रदेश में स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा। पंचायतों और नगरीय निकायों के चुनावों के साथ यह भी अहम रहेगा कि स्थानीय संस्थाओं को अधिकार देने के लिए सरकार नियमों में क्या बदलाव करती है।
अब निगाहें पंचायत राज व्यवस्था में प्रस्तावित बदलाव पर हैं। नए नियम यह तय करेंगे कि गांवों में पंचायतों को कितनी वित्तीय और प्रशासनिक स्वतंत्रता मिलेगी और ग्रामसभा की सहमति की भूमिका किस तरह निर्धारित होगी