पहली बार अपराध करने वालों के लिए मध्य प्रदेश में सामुदायिक सेवा का नया रास्ता; कोर्ट तय  करेगा अपराध,व्यक्ति की क्षमता और परिस्थितियों के आधार पर सेवा का काम  

भोपाल //गलती हुई है, अपराध साबित हुआ है, लेकिन हर छोटे अपराध का जवाब जेल ही हो—यह जरूरी नहीं,मध्य प्रदेश में अब कुछ छोटे अपराधों के मामलों में अदालत दोषी को जेल भेजने के बजाय सामुदायिकसेवा की सजा दे सकती है,यानी सजा भुगतने का मतलब समाज से अलग होना नहीं, बल्कि  कुछ  समयसमाज के लिए काम करना भी हो सकता है,प्रदेश में पहली बार सामुदायिक सेवा के दंड को  प्रभावी किया गया है . इसके तहत दोषी को अस्पताल की सफाई और रखरखाव से लेकर पौधारोपण, सार्वजनिक स्थानों की देखभाल, नगर निकायों में सफाई या अन्य सामाजिक उपयोग के काम करने पड़ सकते हैं।
यह व्यवस्था भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) में किए गए प्रावधान के आधार पर लागू की गई है। गृह विभाग ने इसके लिए अधिसूचना जारी की है।
जेल के बजाय समाज के बीच सजा
सामुदायिक सेवा का मूल विचार यह है कि छोटे अपराध में दोषी व्यक्ति को दंड का अहसास भी हो और उसके श्रम का लाभ समाज को भी मिले।
ऐसे मामलों में अदालत परिस्थितियों को देखते हुए तय कर सकती है कि दोषी को किस प्रकार की सामुदायिक सेवा करनी होगी और कितने समय तक करनी होगी।
किन मामलों में मिल सकती है ऐसी सजा?
अधिसूचना के अनुसार कुछ परिस्थितियों में सामुदायिक सेवा का विकल्प उपलब्ध है। इनमें शामिल हैं—
पहली बार चोरी, जब चोरी की संपत्ति का मूल्य ₹5,000 से कम हो
नशे की हालत में सार्वजनिक स्थान पर दुर्व्यवहार
मानहानि से जुड़े कुछ मामले
आत्महत्या का प्रयास
लोक सेवक द्वारा विधि के निर्देश की अवज्ञा जैसे मामले
ध्यान रहे: सामुदायिक सेवा अपने आप मिलने वाली सजा नहीं है। अदालत मामले की परिस्थितियों और निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुसार फैसला करेगी।
कितने दिन काम करना होगा?
सामुदायिक सेवा की अवधि एक से 60 दिन अथवा 40 से 240 घंटे तक हो सकती है।
इसकी निगरानी के लिए जिला परिवीक्षा अधिकारी या सरकार द्वारा नामित अधिकारी की भूमिका तय की गई है।
सजा का स्वरूप कैसा होगा?
अस्पताल/स्वास्थ्य संस्थान
सफाई, रखरखाव और अन्य सेवा कार्य।
नगर निगम, नगर पालिका या पंचायत
सार्वजनिक स्थलों की सफाई और देखभाल, सड़क किनारे खरपतवार हटाना तथा अनुरक्षण संबंधी कार्य।
सरकारी भवन, पार्क, वृद्धाश्रम और छात्रावास
सफाई और रखरखाव।
पुलिस थाना परिसर
सफाई तथा यातायात या भीड़ नियंत्रण में सहयोग।
वन विभाग
पौधारोपण, पौधों में पानी देना, खरपतवार हटाना और उनकी देखभाल।
चिड़ियाघर और संग्रहालय
सफाई, रखरखाव या आवश्यकतानुसार लिपिकीय सहायता।
अनाथालय और पशु आश्रय गृह
संस्था की जरूरत के अनुसार सेवा कार्य।
इसके अलावा अदालत अन्य सरकारी या सामुदायिक संस्थान में भी उपयुक्त सेवा का आदेश दे सकती है।
डॉक्टर है तो अस्पताल, इंजीनियर है तो कौशल के मुताबिक काम?
सामुदायिक सेवा की यह व्यवस्था केवल शारीरिक श्रम तक सीमित नहीं है।
अधिसूचना में यह प्रावधान भी है कि यदि दोषी व्यक्ति डॉक्टर, इंजीनियर, लेखापाल, अधिवक्ता या किसी अन्य पेशे में कुशल है, तो अदालत उसके पेशेवर कौशल का इस्तेमाल जरूरतमंद या वंचित समुदाय के हित में करने वाला काम तय कर सकती है।
यानी सजा का उद्देश्य केवल काम करवाना नहीं, बल्कि व्यक्ति की क्षमता को समाजोपयोगी बनाना भी हो सकता है।
हर दोषी को एक जैसा काम नहीं मिलेगा
सामुदायिक सेवा का आदेश देते समय अदालत कई पहलुओं पर विचार करेगी—
अपराध की गंभीरता
अपराध कितना गंभीर है और  उसकी परिस्थितियां क्या थीं।

उम्र और शारीरिक क्षमता 
व्यक्ति की उम्र और वह किस तरह का काम करने में सक्षम है।
शिक्षा और कौशल
उसकी शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर क्षमता।
शारीरिक स्थिति
स्वास्थ्य या शारीरिक सीमाओं को भी ध्यान में रखा जाएगा।
सामाजिक-आर्थिक परिस्थिति
व्यक्ति की सामाजिक और आर्थिक स्थिति भी निर्णय का हिस्सा हो सकती है।
काम भी गरिमापूर्ण होना जरूरी
सामुदायिक सेवा का काम अनुपातिक, सुरक्षित और सम्मानजनक होना चाहिए। दोषी से किसी अधिकारी या कर्मचारी का निजी काम नहीं कराया जा सकता।
आदेश नहीं माना तो क्या होगा?
अगर दोषी व्यक्ति अदालत द्वारा तय सामुदायिक सेवा नहीं करता, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की व्यवस्था भी रखी गई है।
पहले चेतावनी दी जा सकती है। परिस्थितियों के अनुसार सेवा की अवधि बढ़ाई जा सकती है या सेवा का स्थान अथवा काम बदला जा सकता है।
इससे सामुदायिक सेवा केवल प्रतीकात्मक आदेश न रहकर निगरानी वाली दंड  व्यवस्था बनती है।
बड़ा सवाल: सजा बदलेगी या सोच?
सामुदायिक सेवा की व्यवस्था छोटे अपराधों के मामलों में दंड की पारंपरिक धारणा को बदलने की कोशिश है। जेल में भेजने के बजाय व्यक्ति को समाज के बीच रहकर समाज के लिए काम करने का अवसर मिलता है।
इसमें एक तरफ दंड का उद्देश्य है, तो दूसरी तरफ सुधार और सामाजिक जिम्मेदारी का विचार भी जुड़ा है।
लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अदालतें इसका इस्तेमाल किन मामलों में करती हैं, निगरानी कितनी प्रभावी रहती है और सामुदायिक सेवा वास्तव में सार्वजनिक हित में कितनी उपयोगी साबित होती है।
 5 बड़ी बातें
01 | जेल हर मामले में जरूरी नहीं
कुछ छोटे अपराधों में अदालत सामुदायिक सेवा का विकल्प इस्तेमाल कर सकती है।
02 | पहली बार अपराध पर फोकस
पहली बार किए गए कुछ छोटे अपराधों में यह व्यवस्था विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
03 | सजा सीधे समाज से जुड़ेगी
सफाई, पौधारोपण, सार्वजनिक स्थानों की देखभाल जैसे काम किए जा सकते हैं।
04 | व्यक्ति की योग्यता भी मायने रखेगी
डॉक्टर, इंजीनियर, वकील या अन्य कुशल व्यक्ति की विशेषज्ञता का समाजहित में उपयोग किया जा सकता है।
05 | निगरानी भी होगी