इटारसी। पिछले साल अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में तवा बांध लबालब था। जलस्तर पूर्ण भराव क्षमता से ऊपर पहुंचने पर बांध के तीन गेट खोलकर पानी छोड़ना पड़ा था। इस साल तस्वीर अलग है। कम बारिश के कारण अक्टूबर के उत्तरार्ध में तवा बांध का जलस्तर करीब 1162 फीट दर्ज किया गया, जबकि इसका पूर्ण भराव स्तर 1166 फीट है। यानी बांध अपनी अधिकतम क्षमता से करीब चार फीट नीचे है। पिछले साल की तुलना में बदली जल उपलब्धता के बीच अब रबी सीजन की सिंचाई के लिए पानी का नियोजन महत्वपूर्ण हो गया है।
एक तरफ जलाशयों में उपलब्ध पानी को देखते हुए सिंचाई के लिए कटौती और सीमित जलापूर्ति की योजनाएं बनाई जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ नर्मदापुरम जिले के आदिवासी विकासखंड केसला में 50 गांवों को सिंचाई सुविधा देने वाली देवरी (दोंडी-झुनकर) उद्वहन सिंचाई परियोजना तीन साल से निर्माण शुरू होने का इंतजार कर रही है। वर्ष 2023 में 154.33 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत इस परियोजना की प्रस्तावित लागत अब बढ़कर 306.63 करोड़ रुपये पहुंच गई है, लेकिन तीन बार टेंडर बुलाने के बाद भी निर्माण एजेंसी नहीं मिली।
सिंचाई के पानी को लेकर बढ़ती चिंता और परियोजना में लगातार हो रही देरी से नाराज किसान शनिवार को पथरौटा स्थित तवा नहर में उतरकर धरने पर बैठ गए। उनकी मांग है कि परियोजना का काम शुरू करने की तारीख लिखित में दी जाए। किसानों का कहना है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा।
पिछले साल गेट खोलकर छोड़ना पड़ा था पानी, इस बार चार फीट नीचे जलस्तर
नर्मदापुरम जिले के तवा बांध की स्थिति इस बार पिछले साल से अलग है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2025 के आखिरी सप्ताह में बांध का जलस्तर 1166.30 फीट तक पहुंच गया था। जलग्रहण क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण बांध से पानी छोड़ना पड़ा था। 27 अक्टूबर 2025 को बांध के तीन गेट तीन-तीन फीट तक खोलकर लगभग 16,070 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था।
इसके विपरीत, अक्टूबर 2026 के उत्तरार्ध में बांध का जलस्तर करीब 1162 फीट दर्ज किया गया। इस साल कम बारिश के कारण बांध पूर्ण भराव स्तर तक नहीं पहुंच सका और उपलब्ध जानकारी के अनुसार मानसून सीजन में इसके गेट नहीं खोले गए।
हालांकि, बांध में चार फीट का अंतर अपने आप में सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी की पूरी तस्वीर नहीं बताता। वास्तविक उपलब्धता का आकलन जलाशय की क्षमता, जल निकासी, पेयजल की जरूरत और सिंचाई के लिए निर्धारित आवंटन के आधार पर किया जाना चाहिए। फिर भी पिछले साल और इस साल के जलस्तर का अंतर रबी सीजन में जल प्रबंधन की अहमियत को रेखांकित करता है।
प्रदेश के कई जिलों में सिंचाई के पानी पर सीमाएं
कम बारिश के कारण मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में रबी फसलों की सिंचाई को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। जलाशयों में उपलब्ध पानी के आधार पर सिंचाई के लिए पानी छोड़ने की सीमा तय की जा रही है। कहीं कम भराव वाले बांधों से सिंचाई के लिए पानी नहीं देने का निर्णय लिया गया है, तो कहीं सीमित संख्या में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने की योजना है।
रतलाम में 50 प्रतिशत से कम भरे जलाशयों से सिंचाई का पानी नहीं देने का निर्णय लिया गया है। 50 से 75 प्रतिशत तक भरे जलाशयों से सीमित पानी देने की व्यवस्था है। छिंदवाड़ा में भी बांधों के भराव के आधार पर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है।
इस बीच प्रदेश के करीब 75 प्रतिशत जिलों में जिला जल उपयोगिता समितियों की बैठकें नहीं हो पाने से सिंचाई की समयबद्ध योजना बनाने में देरी की स्थिति सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, केवल नौ जिलों में बैठकें हो सकी थीं।
हालांकि, अलग-अलग जिलों की जल उपलब्धता और सिंचाई व्यवस्था अलग है। इसलिए प्रदेश के अन्य जिलों में लागू पाबंदियों को सीधे नर्मदापुरम जिले पर लागू मानना उचित नहीं होगा। यहां तवा बांध के जलस्तर और सिंचाई के लिए जारी होने वाले पानी की आधिकारिक योजना महत्वपूर्ण होगी।
306 करोड़ की परियोजना, फिर भी निर्माण एजेंसी नहीं
केसला विकासखंड के किसानों को तवा बांध से पानी लिफ्ट कर खेतों तक पहुंचाने के उद्देश्य से देवरी (दोंडी-झुनकर) उद्वहन सिंचाई परियोजना को वर्ष 2023 में प्रशासकीय स्वीकृति मिली थी। शुरुआती योजना में 35 गांवों को सिंचाई सुविधा देने का लक्ष्य रखा गया था।
बाद में परियोजना में संशोधन कर बारधा रैयत क्षेत्र के 15 गांवों को भी शामिल किया गया। इससे लाभार्थी गांवों की संख्या बढ़कर 50 हो गई। इसी के साथ प्रस्तावित सिंचाई क्षेत्र 7,500 हेक्टेयर से बढ़ाकर 11,000 हेक्टेयर कर दिया गया।
लेकिन परियोजना का दायरा बढ़ने के साथ लागत में भी बड़ी वृद्धि हुई। शुरुआती लागत 154.33 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 306.63 करोड़ रुपये प्रस्तावित है। इसके बावजूद तीन बार टेंडर बुलाए जाने पर भी कोई एजेंसी निर्माण कार्य के लिए आगे नहीं आई।
लागत में करीब 152.30 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है, लेकिन खेतों तक पानी पहुंचाने वाली योजना अब तक जमीन पर नहीं उतर सकी।
परियोजना का काम शुरू होने में हो रही देरी का सीधा असर उन किसानों की उम्मीदों पर पड़ रहा है, जिन्हें इस योजना के माध्यम से सिंचाई सुविधा मिलने की संभावना थी। हालांकि, परियोजना का निर्माण शुरू होने के बाद भी खेतों तक पानी पहुंचने में कितना समय लगेगा, यह निर्माण और संचालन की समयसीमा तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
अधिकारियों से चर्चा बेनतीजा, नहर में उतरे किसान
परियोजना शुरू कराने की मांग को लेकर धरना देने से पहले शुक्रवार शाम केसला तहसील कार्यालय में ग्रामीणों और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के बीच चर्चा हुई थी। तवा सिंचाई परियोजना के कार्यपालन यंत्री अंकित सराफ अपनी टीम के साथ पहुंचे। नायब तहसीलदार दिलीप परते की मौजूदगी में अधिकारियों ने ग्रामीणों की मांग शासन स्तर तक पहुंचाने और कलेक्टर से चर्चा कराने का प्रस्ताव दिया।
लेकिन तीन साल से इंतजार कर रहे किसान केवल आश्वासन के आधार पर आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं हुए। शनिवार को ग्रामीण पथरौटा स्थित तवा नहर में उतरकर धरने पर बैठ गए।
'हमारा गांव' संगठन के दुर्गेश धुर्वे ने कहा कि अधिकारी चर्चा के दौरान केवल कागजी आश्वासन लेकर आए थे। जब तक परियोजना का काम जमीन पर शुरू नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
किसानों की मांग है कि संबंधित मंत्री या वरिष्ठ अधिकारी लिखित में बताएं कि परियोजना का काम कब शुरू होगा और इसे कब तक पूरा किया जाएगा।
देर शाम तक समझाइश, लेकिन किसान अपनी मांग पर अड़े
धरने की सूचना मिलने पर सिंचाई विभाग की प्रभारी अधीक्षण यंत्री प्रतिभा सिंह और एसडीएम नीलेश शर्मा मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों को समझाकर धरना समाप्त कराने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे।
किसान नेता पुष्पराज पटेल ने चेतावनी दी कि यदि परियोजना का काम शुरू नहीं किया गया, तो आगामी सीजन में नहर में पानी छोड़ने का विरोध किया जाएगा।
धरने में जिला कांग्रेस अध्यक्ष शिवाकांत गुड्डन पांडे, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष पुष्पराज पटेल जिला किसान काँग्रेस अध्यक्ष बाबू चौधरी समेत अन्य कांग्रेस नेता भी किसानों के समर्थन में पहुंचे। मौके पर पुलिस बल तैनात रहा।
सांसद और विधायक के सामने भी उठ चुका है मुद्दा
परियोजना में देरी का मुद्दा सांसद दर्शन सिंह चौधरी के सामने भी उठाया जा चुका है। आदिवासी नेता फागराम ने उन्हें बताया था कि वर्ष 2023 में स्वीकृति मिलने के बावजूद निर्माण शुरू नहीं हुआ। सांसद ने संबंधित स्तर पर मामला उठाने का आश्वासन दिया था।
विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा से भी मोबाइल पर चर्चा की गई। उन्होंने जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से बात करने का आश्वासन दिया।
अब किसानों को चाहिए काम शुरू होने की तारीख
तवा बांध के जलस्तर में पिछले साल के मुकाबले अंतर और रबी सीजन में सिंचाई के पानी की जरूरत ने जल प्रबंधन को महत्वपूर्ण बना दिया है। ऐसे समय में केसला के किसानों की मांग केवल एक लंबित परियोजना शुरू कराने तक सीमित नहीं है। वे अपने खेतों तक सिंचाई सुविधा पहुंचने का ठोस भरोसा चाहते हैं।
परियोजना की लागत में करीब 152 करोड़ रुपये की वृद्धि, तीन बार टेंडर के बावजूद एजेंसी नहीं मिलना और निर्माण की समयसीमा स्पष्ट नहीं होना शासन और जल संसाधन विभाग के सामने गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब देखना यह है कि किसानों को एक बार फिर आश्वासन मिलता है या शासन परियोजना का काम शुरू कराने के लिए समयबद्ध निर्णय लेता है।
फिलहाल, 50 गांवों के किसानों की निगाहें उसी फैसले पर टिकी हैं, जिसका इंतजार उन्हें वर्ष 2023 से है।
पिछले साल लबालब था तवा बांध, इस बार 4 फीट नीचे; इधर 306 करोड़ की सिंचाई परियोजना तीन साल से अटकी
कम बारिश के बीच रबी की सिंचाई पर बढ़ी चिंता, 50 गांवों के 11 हजार हेक्टेयर खेतों तक पानी पहुंचाने की योजना टेंडर में उलझी; किसानों ने तवा नहर में उतरकर दिया धरन
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