इटारसी। शहर के पुराने बस स्टैंड को बंद कर बसों का संचालन पुरानी इटारसी स्थित नए बस स्टैंड से शुरू कराने का मामला फिलहाल सुलझता नजर नहीं आ रहा है। विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा के निर्देश पर पुराने बस स्टैंड पर पिक एंड ड्रॉप की सुविधा भी बंद कर दी गई है। दूसरी ओर, कांग्रेस के एक धड़े और कुछ व्यापारी संगठनों ने इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया है। प्रशासन ने भी स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि फिलहाल पुराने बस स्टैंड पर बसों को रुकने की अनुमति देने के मूड में वह नहीं है।इस टकराव के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहर को जाम से मुक्ति दिलाने और नए बस स्टैंड को व्यवस्थित रूप से संचालित करने की कोशिश में यात्रियों की सुविधा और पुराने बाजार के कारोबार को किस तरह संतुलित किया जाएगा।
एक फैसले पर दो तस्वीरें, प्रशासन और जनप्रतिनिधि सख्त
स्टेशन रोड स्थित पुराने बस स्टैंड पर 14 अक्टूबर से बसों का संचालन बंद कर दिया गया था। नगरपालिका ने बैरिकेड्स लगाकर बसों की आवाजाही रोक दी और बस संचालकों को पुरानी इटारसी स्थित नए बस स्टैंड से संचालन करने के निर्देश दिए।लेकिन पुराना बस स्टैंड बंद होने के बाद समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई। बस संचालकों ने ओवरब्रिज के आसपास बसें खड़ी करना शुरू कर दिया। इससे यातायात और यात्रियों की आवाजाही को लेकर नई मुश्किलें सामने आने लगीं।विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा, नगर पालिका अध्यक्ष पंकज चौरे और एसडीएम नीलेश शर्मा ने नए बस स्टैंड का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। विधायक ने ओवरब्रिज के आसपास लंबे समय तक खड़ी रहने वाली बसों पर चालानी कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रशासन ने भी संकेत दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले बस संचालकों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।यानी पुराने बस स्टैंड पर बसों को रोकने की छूट देने के बजाय प्रशासन अब नए बस स्टैंड से शत-प्रतिशत संचालन सुनिश्चित करने पर जोर दे रहा है।
पांच मिनट के पिक एंड ड्रॉप पर अटका पूरा विवाद
विरोध कर रहे व्यापारियों और कांग्रेस नेताओं की प्रमुख मांग यह है कि पुराने बस स्टैंड पर कम से कम पांच मिनट के लिए पिक एंड ड्रॉप की सुविधा बहाल की जाए।उनका तर्क है कि रेलवे स्टेशन रोड शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में शामिल है। यहां बसों के रुकने से यात्रियों को सामान लेकर दूर तक जाने की परेशानी नहीं होती और बाजार में आने-जाने वाले लोगों की सुविधा भी बनी रहती है।पुरानी इटारसी में नया बस स्टैंड शुरू होने पर किसी को आपत्ति नहीं होने की बात कहते हुए विरोध करने वाले लोग पुराने बस स्टैंड पर सीमित समय के लिए बसें रोकने की अनुमति चाहते हैं।इसके विपरीत, विधायक का तर्क है कि पहले भी पिक एंड ड्रॉप की व्यवस्था लागू की गई थी, लेकिन बस संचालकों ने निर्धारित समय का पालन नहीं किया। बसें दो मिनट के बजाय लंबे समय तक खड़ी रहीं, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। ऐसे में दोबारा सुविधा शुरू करने पर नियमों का पालन सुनिश्चित करने की गारंटी कौन देगा?यही वह बिंदु है, जहां दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती दिखाई नहीं दे रही है। संभवत: सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों नए इस बार इस मुद्दे को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है ।
कांग्रेस में विरोध के स्वर, लेकिन एकजुटता पर सवाल
बस स्टैंड के मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर भी एक जैसी सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है। पार्टी का एक धड़ा व्यापारियों के समर्थन में खुलकर सामने आया है और मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दे रहा है। वहीं, कुछ नेता फिलहाल इस मुद्दे पर सक्रिय नजर नहीं आ रहे हैं।कांग्रेस सेवादल यंग ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष गजानन तिवारी के नेतृत्व में पुराने बस स्टैंड पर बैठक कर आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने की बात सामने आई है। विरोध कर रहे नेताओं का कहना है कि यात्रियों और व्यापारियों की सुविधा के लिए पांच मिनट का पिक एंड ड्रॉप शुरू होना चाहिए।हालांकि, फिलहाल आंदोलन की अगली कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। कांग्रेस का मुखर धड़ा जिला प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन पर कार्रवाई और उसके रुख का इंतजार कर रहा है।दशहरे के बाद आंदोलन तेज करने की चर्चाएं भी थीं, लेकिन अब तक विरोध किस रूप में आगे बढ़ेगा, यह साफ नहीं हो पाया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस इस मुद्दे पर व्यापक जनसमर्थन जुटा पाएगी या विरोध सीमित दायरे में ही रहेगा।
व्यापारी परेशान, लेकिन नेतृत्व पर भरोसे का सवाल
इस विवाद में व्यापारियों की भूमिका भी अहम है। पुराने बस स्टैंड के आसपास कारोबार करने वाले कुछ व्यापारी पिक एंड ड्रॉप बंद होने से चिंतित हैं। उन्हें आशंका है कि यात्रियों की आवाजाही प्रभावित होने से बाजार के कारोबार पर भी असर पड़ सकता है।लेकिन व्यक्तिगत बातचीत में कुछ व्यापारियों ने आंदोलन की अगुवाई कर रहे नेताओं को लेकर भरोसे की कमी भी जताई है। उनके मुताबिक, परेशानी तो है, लेकिन आंदोलन में खुलकर सामने आने से पहले वे उसके नेतृत्व और परिणाम को लेकर आश्वस्त होना चाहते हैं।यह स्थिति विरोध की ताकत और उसकी व्यापकता, दोनों के लिए चुनौती बन सकती है। व्यापारियों की नाराजगी को संगठित आंदोलन में बदलना आसान नहीं होगा, यदि वे नेतृत्व के साथ पूरी तरह खड़े होने को तैयार नहीं हैं।
नए बस स्टैंड के आसपास के व्यापारी फैसले के समर्थन में
इस विवाद की दूसरी तस्वीर नए बस स्टैंड के आसपास देखने को मिल रही है। यहां के कुछ व्यापारियों ने नए बस स्टैंड के संचालन और यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए विधायक, नगर पालिका अध्यक्ष और एसडीएम के फैसले का स्वागत करते हुए आभार जताया है।उनका मानना है कि नए बस स्टैंड का नियमित संचालन क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकता है। इस तरह बस स्टैंड के मुद्दे पर व्यापारियों की राय भी एक जैसी नहीं है। पुराने बाजार के कुछ व्यापारी पिक एंड ड्रॉप की बहाली चाहते हैं, जबकि नए बस स्टैंड के आसपास के व्यापारी शिफ्टिंग के फैसले को सकारात्मक पहल मान रहे हैं।
आठ दिन बाद भी पार्किंग शुरू नहीं, यात्रियों की सुविधाओं पर भी सवाल
पुराने बस स्टैंड को बंद करने के बाद नगरपालिका ने यहां दोपहिया वाहनों की पार्किंग शुरू करने की योजना बनाई थी। बाजार में काम करने वाले कर्मचारियों की बाइक पार्क करने के लिए इस स्थान का उपयोग किया जाना था, लेकिन आठ दिन बाद भी पार्किंग व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी थी।नगरपालिका अध्यक्ष पंकज चौरे ने दो से तीन दिन में पार्किंग शुरू करने की बात कही थी। इसके लिए बैरिकेड्स की व्यवस्था में बदलाव किया जाना प्रस्तावित था।उधर, नए बस स्टैंड पर यात्रियों के लिए प्रतीक्षालय में रोशनी, बैठने की व्यवस्था, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। एसडीएम ने ऑटो और अन्य यात्री वाहनों के किराये निर्धारित करने की बात भी कही है, ताकि यात्रियों से मनमाना किराया नहीं वसूला जाए।इन व्यवस्थाओं का समय पर पूरा होना जरूरी है, क्योंकि बसों की शिफ्टिंग तभी यात्रियों के लिए सुविधाजनक साबित होगी, जब नए बस स्टैंड तक पहुंचने और वहां से आगे जाने की व्यवस्था भी सुचारु हो।
अब निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर
बस स्टैंड विवाद अब केवल स्थान बदलने का मामला नहीं रह गया है। एक तरफ प्रशासन यातायात व्यवस्था सुधारने और नए बस स्टैंड को पूरी तरह संचालित करने पर जोर दे रहा है, तो दूसरी तरफ पुराने बाजार के कुछ व्यापारी और कांग्रेस नेता सीमित समय के लिए पिक एंड ड्रॉप की सुविधा चाहते हैं।फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। कांग्रेस के आंदोलन की अगली रणनीति और जिला प्रशासन की कार्रवाई इस विवाद की दिशा तय कर सकती है।लेकिन इस पूरे विवाद के बीच सबसे जरूरी सवाल यही है—क्या शहर को जाम से राहत देने की व्यवस्था यात्रियों की सुविधा और बाजार की जरूरतों के साथ बनाई जा सकेगी, या बस स्टैंड की शिफ्टिंग का मुद्दा प्रशासन और विपक्ष के बीच टकराव तक सीमित रह जाएगा?
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