भोपाल। थाने में शिकायत लेकर पहुंचे और FIR दर्ज नहीं हुई तो अब आवेदक के लिए पुलिस मुख्यालय ने अगला रास्ता स्पष्ट कर दिया है। शिकायतकर्ता अपनी शिकायत डाक के जरिए सीधे पुलिस अधीक्षक (SP) को भेज सकता है। SP शिकायत पर विचार करेंगे और जरूरत पड़ने पर संबंधित थाने के पुलिसकर्मियों से जवाब मांगेंगे। शिकायत सही पाए जाने पर FIR दर्ज करने के निर्देश भी दिए जा सकेंगे।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) में इस व्यवस्था का प्रावधान है।अब पुलिस मुख्यालय ने इस प्रावधान को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए भोपाल  और इंदौर पुलिस आयुक्तों, सभी जिलों के SP तथा अन्य पुलिस इकाइयों को निर्देश जारी किए हैं।
हर थाने के नोटिस बोर्ड पर दिखेगा शिकायत का रास्ता
पुलिस मुख्यालय ने कहा है कि FIR दर्ज नहीं होने की स्थिति में SP को शिकायत भेजने से संबंधित जानकारी SP कार्यालय और प्रत्येक पुलिस थाने के नोटिस बोर्ड पर बड़े अक्षरों में प्रदर्शित की जाए।
इसका सीधा मतलब यह है कि शिकायतकर्ता को केवल इस वजह से थाने के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे कि वहां उसकी FIR दर्ज नहीं की जा रही है। वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तक अपनी शिकायत पहुंचा सकेगा।
FIR रोकने वाले पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई
पीएचक्यू की CID शाखा के स्पेशल डीजी पंकज श्रीवास्तव ने जारी निर्देश में कहा है कि शिकायत को टालने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ SP कार्रवाई  करें।
यानी व्यवस्था सिर्फ शिकायत को ऊपर तक पहुंचाने तक सीमित नहीं है। यदि जांच में सामने आता है कि मामला FIR दर्ज किए जाने योग्य था और थाने के स्तर पर शिकायत को जानबूझकर टाला गया, तो संबंधित पुलिसकर्मियों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है।
छोटी चोरी से साइबर ठगी तक अलग-अलग रास्ते
हर मामले में थाने जाकर FIR दर्ज कराने की जरूरत नहीं है। छोटी-मोटी चोरी और कुछ अन्य अपराधों के लिए ई-FIR की सुविधा भी उपलब्ध है। वहीं 25 हजार रुपये से अधिक की साइबर ठगी के मामलों में ऑनलाइन ईजीरो FIR दर्ज किए जाने की व्यवस्था है।
ऐसी ऑनलाइन FIR को नियमित FIR में बदलने के लिए आवेदक को सात दिन के भीतर थाने जाकर आगे की कार्रवाई पूरी करनी होती है।
आदेश नहीं माना तो पुलिस कर सकेगी निवारक कार्रवाई
पीएचक्यू ने पुलिस की कार्रवाई और उसके रिकॉर्ड को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। BNSS की धारा 172 के तहत ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारी द्वारा दिए गए वैध कानूनी निर्देश का पालन करना नागरिकों के लिए जरूरी होगा।
यदि कोई व्यक्ति पुलिस के निर्देश की अवहेलना करता है या मौके पर स्थिति बिगाड़ने की कोशिश करता है, तो पुलिस कानून के तहत तत्काल निवारक कार्रवाई कर सकती है। कुछ परिस्थितियों में बिना वारंट या मजिस्ट्रेट के आदेश के हिरासत में लेने की  कार्रवाई भी की जा सकती है।
हालांकि मामूली मामलों में हिरासत में लिए गए व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर छोड़ने का प्रावधान लागू रहेगा।
धरना-प्रदर्शन की कार्रवाई अब रोजनामचे में दर्ज होगी
धरना, आंदोलन या प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा की गई निवारक कार्रवाई का भी अब रिकॉर्ड रखना होगा। पुलिस को ऐसी कार्रवाई का पूरा विवरण थाने के रोजनामचे में दर्ज करना अनिवार्य  किया गया है।
इससे मौके पर की गई पुलिस कार्रवाई का लिखित रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा और बाद में यह पता लगाया जा सकेगा कि किस परिस्थिति में, किस व्यक्ति के खिलाफ और किस आधार पर कार्रवाई की गई।
आम आदमी के लिए सबसे अहम बात
FIR दर्ज नहीं हुई → शिकायत SP तक पहुंचाने का रास्ता खुला।
शिकायत सही मिली → SP संबंधित थाने को FIR दर्ज करने के निर्देश दे सकते हैं।
शिकायत टालने वाले पुलिसकर्मी → विभागीय कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
पुलिस कार्रवाई → रोजनामचे में दर्ज करना होगा।