इटारसी। जीएसटी के नाम पर कागजों में कारोबार खड़ा कर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लेने या वास्तविक बिक्री छिपाकर टैक्स बचाने वाले कारोबारियों पर अब विभाग की नजर रहेगी। स्टेट जीएसटी इटारसी सर्किल की असिस्टेंट कमिश्नर रेणुका चौहान उइके ने कहा कि टैक्स चोरी की विश्वसनीय सूचना मिलने पर विभाग तथ्यों की जांच कर नियमानुसार त्वरित कार्रवाई करेगा।
उन्होंने बताया कि बिना माल या सेवा की वास्तविक आपूर्ति के फर्जी बिल जारी करना, ऐसे बिलों के आधार पर आईटीसी लेना, बिक्री छिपाना या गलत जानकारी देना जीएसटी कानून के तहत कार्रवाई का आधार बन सकता है। विभाग रिटर्न, बिल और उपलब्ध अन्य विवरणों का मिलान कर अनियमितताओं की जांच कर सकता है।
कागजों का कारोबार भी जांच के दायरे में
जीएसटी विभाग की नजर केवल घोषित कारोबार तक सीमित नहीं है। ऐसे कारोबारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं, जिनका वास्तविक टर्नओवर जीएसटी के दायरे में आने के बावजूद पंजीयन या विवरण में सामने नहीं आ रहा है। माल परिवहन में ई-वे बिल और लागू होने पर ई-इनवॉयस के नियमों का पालन भी अनिवार्य है।

गलती सिर्फ टैक्स तक सीमित नहीं
फर्जी दस्तावेजों, गलत तरीके से आईटीसी लेने या कर चोरी के मामलों में सिर्फ बकाया टैक्स की वसूली ही नहीं, बल्कि ब्याज और जुर्माने की कार्रवाई भी हो सकती है। गंभीर मामलों में सीजीएसटी कानून के तहत अभियोजन और कारावास का प्रावधान भी है।
कारोबारियों को रिकॉर्ड दुरुस्त रखने की सलाह
असिस्टेंट कमिश्नर ने कारोबारियों से वास्तविक खरीद-बिक्री के अनुरूप बिल जारी करने, सही रिकॉर्ड रखने और समय पर रिटर्न दाखिल करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग को कर चोरी की विश्वसनीय सूचना मिलने पर रिकॉर्ड की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।