"मेरा जीवन मुझे पसंद नहीं था, इसलिए मैंने अपना जीवन स्वयं बना लिया। मैं सिर्फ देखने के लिए पैदा नहीं हुई थी, बनाने के लिए पैदा हुई थी।"ये शब्द हैं दुनिया की सबसे बड़ी फैशन डिजाइनर कोको चैनल के। उनका ये एक वाक्य बहुत गहरी बात कहता है - अगर जिंदगी जैसी है, वैसी पसंद नहीं है तो शिकायत करने की जगह उसे नए सिरे से बनाना शुरू करो।
असल में इसका मतलब क्या है?
हम में से कई लोग मन ही मन सोचते हैं कि नौकरी ठीक नहीं लग रही, रिश्ते बोझ लग रहे हैं, या रोज की जिंदगी में कुछ कमी है। फिर भी हम चुपचाप उसी में लगे रहते हैं।
कोको चैनल कहती हैं, यही असंतोष एक इशारा है। ये बताता है कि अब बदलाव का समय है। दर्शक बनकर अपनी ही जिंदगी को देखते रहने से कुछ नहीं होगा। खुद उतरकर अपनी कहानी लिखनी पड़ेगी।
इस विचार को 3 बातों में समझें:
1. असंतोष को संकेत समझो: अगर कुछ अंदर खटक रहा है तो उसे दबाओ मत। वो बता रहा है कि तुम्हें कुछ बदलना है।
2. सिर्फ देखना बंद करो: अपनी ही जिंदगी में दर्शक बनकर रहोगे तो पछतावा ही हाथ लगेगा।
3. बनाने की जिम्मेदारी लो: नई जिंदगी बनाने में थोड़ी परेशानी, मेहनत और डर तो आएगा ही। उसे स्वीकार करना पड़ेगा।
हम दर्शक क्यों बन जाते हैं?
क्योंकि बदलाव से डर लगता है। हमें लगता है - लोग क्या कहेंगे, पैसा कैसे चलेगा, परिवार क्या सोचेगा। इसलिए हम वही करते हैं जो सब कर रहे हैं। दूसरों से तुलना करते रहते हैं और अपनी खुशी भूल जाते हैं।
कोको कहती हैं, दूसरों जैसा बनने से खुशी नहीं मिलती। अपनी शर्तों पर जिंदगी को परिभाषित करना सीखो।
ये किसकी कहानी है? - कोको चैनल कौन थीं?
कोको का असली नाम था गैब्रिएल बोन्हूर चैनल। जन्म 19 अगस्त 1883 को फ्रांस के एक बहुत गरीब परिवार में हुआ। मां के जाने के बाद पिता उन्हें अनाथालय में छोड़ गए। वहीं उन्होंने सिलाई सीखी।
कैफे में गाना गाते हुए उन्हें 'कोको' नाम मिला। 1910 में उन्होंने पेरिस में टोपियों की छोटी सी दुकान खोली। फिर धीरे-धीरे उन्होंने आरामदायक कपड़े बनाए, महिलाओं को टाइट कॉर्सेट से आजादी दिलाई, दुनिया का सबसे मशहूर इत्र 'चैनल नंबर 5' बनाया और 'लिटिल ब्लैक ड्रेस' दी।
70 साल की उम्र में जब सबने सोचा उनका दौर खत्म हो गया, तब उन्होंने वापसी की और फिर से पूरी दुनिया पर छा गईं।
उनका जीवन ही इस बात का सबूत है कि शुरुआत कैसी भी हो, अंत आप खुद लिख सकते हैं।
इस विचार से हम क्या सीख सकते हैं?
1. तुम्हारा जन्म कहां हुआ है, उससे तुम्हारा भविष्य तय नहीं होता।
2. अंदर का खालीपन बदलाव का पहला संकेत है, इसे सुनो।
3. बदलाव में थोड़ी घबराहट होगी, ये सामान्य है।
4. सिर्फ सोचते रहने से कुछ नहीं होगा, एक छोटा कदम तो उठाना ही होगा।
5. अगर समाज की उम्मीदें तुम्हें खुश नहीं रख रहीं तो उनसे हटने की खुद को इजाजत दो। 6. अपनी तुलना दूसरों से नहीं, खुद से करो।
कोको चैनल के लिए आत्मविश्वास का मतलब ये नहीं था कि सब कुछ परफेक्ट होगा। आत्मविश्वास का मतलब है - ये भरोसा कि मेरी जिंदगी मेरी मेहनत के लायक है।
स्पष्टता पहले नहीं आती। पहले आप फैसला लेते हैं, फिर रास्ते पर चलते हैं, तब धीरे-धीरे आत्मविश्वास और स्पष्टता दोनों आते हैं।
इसलिए अपनी परिस्थितियों को दोष देने के बजाय, अपने जीवन के निर्माण का अधिकार अपने हाथ में लें। बदलाव की शुरुआत एक छोटे लेकिन दृढ़ फैसले से होती है—क्या आप अपने जीवन के दर्शक बने रहना चाहते हैं या उसके रचयिता?
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