पढ़ने को हम अक्सर काम या परीक्षा से जोड़ देते हैं। लेकिन कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के साइकेट्री डिपार्टमेंट की एक नई समीक्षा ने इसे सीधे आपकी सेहत से जोड़ दिया है।
प्रोफेसर बारबरा सहकियन और डॉ. क्रिस्टेल लैंगली की यह समीक्षा प्रतिष्ठित जर्नल Psychological Medicine में प्रकाशित हुई है। इसे The Queen's Reading Room - क्वीन कैमिला द्वारा स्थापित चैरिटी - के साथ National Year of Reading के तहत जारी किया गया है।
शोधकर्ताओं का निष्कर्ष बहुत साफ है:"इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम क्या पढ़ते हैं या कैसे पढ़ते हैं। आनंद के लिए पढ़ना ही काफी है।"
तो क्या कहती है स्टडी?
वैज्ञानिकों ने 5 सर्वे और 8 लॉन्ग-टर्म स्टडीज के डेटा को मिलाकर देखा, जिसमें दसियों हजार लोग शामिल थे।
1. सबसे मजबूत सबूत बच्चों पर: 10,000 से अधिक युवाओं पर की गई उनकी अपनी स्टडी में पाया गया कि जिन बच्चों ने कम उम्र में ही मजे के लिए पढ़ना शुरू किया, उनमें - बेहतर ध्यान, याददाश्त और प्रॉब्लम सॉल्विंग क्षमता विकसित हुई।
कैंब्रिज की वेबसाइट के अनुसार, ऐसे बच्चों में बेहतर एकेडमिक रिजल्ट के साथ-साथ कम मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, ज्यादा नींद और कम स्क्रीन टाइम जैसी हेल्दी लाइफस्टाइल भी देखी गई।
2. बड़ों के लिए ब्रेन-शील्ड: आनंद के लिए पढ़ना - चाहे जेन ऑस्टेन का क्लासिक हो या Heartstopper ग्राफिक नॉवेल - बेहतर मानसिक स्वास्थ्य, ज्यादा सहानुभूति और डिमेंशिया के कम जोखिम से जुड़ा है।
3. अकेले नहीं, साथ पढ़ना और बेहतर:रिव्यू में कहा गया है कि दूसरों के साथ पढ़ने से, चाहे वह बुक क्लब हो या माता-पिता का बच्चों के साथ पढ़ना, और भी अधिक फायदे मिल सकते हैं।
प्रोफेसर की राय
"पढ़ना हमारे दिमाग की सेहत को बेहतर बनाने, जरूरी सोचने-समझने की क्षमता विकसित करने का शानदार तरीका है। इसके फायदों के बढ़ते सबूतों को देखते हुए, हमें बचपन से ही इसे बढ़ावा देना चाहिए। इससे हमें जीवन भर, यहां तक कि बुढ़ापे में भी फायदे मिल सकते हैं।"
प्रो. सहकियन मानती हैं कि पढ़ने की आदत आज रिकॉर्ड निचले स्तर पर है, खासकर किशोर लड़कों और वंचित पृष्ठभूमि के बच्चों में।
डॉ. लैंगली का सुझाव है - "जरूरी है कुछ ऐसा ढूंढना जो सच में पसंद हो - कोई टीवी शो, गेम भी हो सकता है। कॉमिक्स और ग्राफिक नॉवेल भी अच्छी शुरुआत हो सकते हैं, क्योंकि वे उपन्यासों से कम डरावने लगते हैं।"
5 बड़े फायदे जो रिसर्च ने गिनाए
1 याददाश्त और एकाग्रता: नियमित पढ़ने से ब्रेन के एग्जीक्यूटिव फंक्शन मजबूत होते हैं।
2. तनाव कम, नींद बेहतर: पढ़ना स्ट्रेस हार्मोन घटाता है।
3. सहानुभूति बढ़ती है: कहानियों में किरदारों के साथ जीने से दूसरों को समझने की क्षमता बढ़ती है।
4. डिमेंशिया से बचाव: दिमाग लगातार एक्टिव रहने से उम्र के साथ होने वाली संज्ञानात्मक गिरावट धीमी होती है।
5. हेल्दी लाइफस्टाइल: पढ़ने वाले बच्चों और बड़ों में स्क्रीन टाइम अपने आप कम होता है।
60 के बाद कैसे डालें आदत? - पाठकों के लिए 4 टिप्स
1. क्या पढ़ना है का दबाव छोड़ें: अखबार का संपादकीय, धार्मिक ग्रंथ, जासूसी उपन्यास - जो अच्छा लगे वही पढ़िए।
2. रोज 15 मिनट का नियम: रात में सोने से पहले 15 मिनट किताब, फोन नहीं।
3. साथ पढ़िए: मोहल्ले में 3-4 लोगों का बुक क्लब बनाइए, या पोते-पोतियों को कहानी पढ़कर सुनाइए।
4. फॉर्मेट की चिंता नहीं: किताब, किंडल, ऑडियोबुक या बड़ा प्रिंट - माध्यम मायने नहीं रखता।
क्या आप जानते हैं?
कैंब्रिज टीम ने 2025 में 'Brain Boost: Healthy Habits for a Happier Life' किताब लिखते हुए ही महसूस किया कि आनंद के लिए पढ़ने पर आश्चर्यजनक रूप से बहुत कम रिसर्च हुई है। इसी कमी को पूरा करने के लिए यह रिव्यू किया गया।
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