भोपाल। अगस्त में भंग, अक्टूबर में घोषणा का वादा और अब नए साल तक इंतजार... मप्र कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी का हाल फिलहाल यही है।
पार्टी हाईकमान के भरोसे संगठन, और सड़क पर वोट चोरी का शोर - इस दोहरी रणनीति के बीच 310 पदाधिकारियों वाली प्रदेश कांग्रेस एक बार फिर बिना कार्यकारिणी के ही बड़े आयोजनों में कूदने जा रही है।
सूत्रों की मानें तो कार्यकारिणी नहीं बनने की वजह सिर्फ व्यस्तता नहीं, बल्कि नियुक्तियों को लेकर खींचतान भी है। भोपाल में हुई पीएसी की बैठक में कार्यकारिणी भंग करने का ऐलान तो हो गया, दिल्ली में समीक्षा में सक्रिय नेताओं को लाने पर सहमति भी बन गई, लेकिन किसे सक्रिय मानना है, इस पर सहमति नहीं बन पा रही।
नतीजा - संगठन महासचिव डॉ. संजय कामले को कहना पड़ रहा है कि अंतिम फैसला हाईकमान ही लेगा।
आंदोलन के पीछे संगठन को टालने की रणनीति?
पार्टी ने अभी पूरा फोकस 3 बड़े मोर्चों पर लगा दिया है -
1. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और वोट चोरी के मुद्दे पर लगातार प्रदर्शन 2. 1 नवंबर को दिल्ली में प्रस्तावित महारैली 3. 26 से 28 नवंबर तक संविधान दिवस पर कार्यक्रम
प्रदेश कांग्रेस का तर्क है कि इन कार्यक्रमों में ज्यादा से ज्यादा कार्यकर्ताओं को जोड़ना है, इसलिए कार्यकारिणी बाद में बनेगी। लेकिन अंदरूनी हकीकत यह है कि पिछले एक साल में संगठन का ढांचा लगातार सिकुड़ रहा है।
54 प्रकोष्ठों को घटाकर पहले 39 किया गया, अब लक्ष्य 25 तक लाने का है। 59 विभाग और प्रकोष्ठ अगस्त में ही भंग किए जा चुके हैं, तब से उनका कामकाज ठप है। यानी आंदोलन के शोर में संगठन की जमीनी मशीनरी ही सुस्त पड़ी है।
अक्टूबर 2024 में बनी पिछली कार्यकारिणी के बाद अब तक नई टीम का इंतजार कर रहे कार्यकर्ताओं के लिए साफ संदेश है - फिलहाल कुर्सी नहीं, झंडा उठाओ।
Continue With Google
Comments (0)